हजारीबाग में साइबर ठगी का खुलासा, 5 आरोपी गिरफ्तार; EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी के नाम पर करते थे ठगी
किराए के मकान में चल रहा था कथित साइबर ठगी का नेटवर्क
11 मोबाइल, लैपटॉप और फर्जी दस्तावेज बरामद
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग में पुलिस ने कथित साइबर ठगी के एक मामले का खुलासा करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी किराए के मकान में रहकर लोगों को टाटा पावर के EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर ठगी करते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमरदीप यादव, संजीव कुमार, संटू कुमार, प्रवीण कुमार और राजू कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी बिहार के नवादा और नालंदा जिले के रहने वाले हैं।
किराए के मकान में चल रहा था साइबर ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, हजारीबाग एसपी अमन कुमार को सूचना मिली थी कि बाबा पथ, हुरहुरू इलाके में कुछ लोग किराए के मकान में रहकर साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने बाबा पथ हुरहुरू स्थित रामेंद्र कुमार सिंह के मकान की घेराबंदी कर छापेमारी की। मौके से पांच लोगों को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा गया। पूछताछ और तलाशी के दौरान पुलिस को कथित साइबर ठगी से जुड़े अहम सुराग मिले। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपियों के कथित तरीके का पता चला, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा दिया जाता था।
EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी के नाम पर ठगी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी टाटा पावर के EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी लगाने के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद फ्रेंचाइजी दिलाने, रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी या अन्य प्रक्रिया के नाम पर उनसे मोटी रकम मांगी जाती थी। आरोपियों के पास से बरामद फर्जी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों को किस तरह तैयार किया जाता था और कथित ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर तलाशते थे अपने शिकार
पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संभावित पीड़ितों की तलाश के लिए करते थे। ऐसे लोगों की पहचान की जाती थी, जो साइड इनकम या अतिरिक्त कमाई का जरिया तलाश रहे हों। इसके बाद आरोपियों की ओर से मैसेज या फोन कॉल के जरिए संपर्क किया जाता था। बातचीत के दौरान उन्हें EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी से कमाई का लालच दिया जाता था। विश्वास में लेने के बाद उनसे कथित तौर पर रकम की मांग की जाती थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और कथित तौर पर कितनी रकम की ठगी की गई।
11 मोबाइल और लैपटॉप समेत फर्जी दस्तावेज बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इससे कथित साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस की अपील- पैसे देने से पहले करें सत्यापन
हजारीबाग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के ऑनलाइन ऑफर, फ्रेंचाइजी, निवेश या कमाई से जुड़े प्रस्ताव पर बिना सत्यापन के पैसे का लेनदेन न करें। पुलिस ने कहा है कि किसी कंपनी या फ्रेंचाइजी के नाम पर संपर्क किए जाने पर संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से इसकी पुष्टि करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के खाते में पैसा भेजने से पहले पूरी जानकारी की जांच जरूरी है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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