26 दिन के छात्र आंदोलन के बाद जयपाल सिंह स्टेडियम में तालाबंदी, पुलिस छावनी में तब्दील
रांची: राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम एक बार फिर चर्चा में है। करीब 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन का गवाह रहा यह मैदान अब पूरी तरह पुलिस सुरक्षा के घेरे में है। छात्रों के आंदोलन की समाप्ति और उनकी आभार यात्रा के बाद प्रशासन ने स्टेडियम के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी है। इसके साथ ही स्टेडियम और आसपास के इलाके में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। स्टेडियम के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि परिसर या आसपास दोबारा बड़ी संख्या में छात्र अथवा प्रदर्शनकारी एकत्रित न हो सकें।
गणेश पूजा के लिए भी नहीं मिली एंट्री
स्टेडियम में तालाबंदी का असर पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों पर भी दिखाई दिया। गणेश पूजा के लिए भूमि पूजन करने पहुंचे पूजा समिति के सदस्यों को भी स्टेडियम परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद समिति के सदस्यों ने मुख्य गेट के बाहर ही भूमि पूजन की रस्म पूरी की। इस घटना के बाद स्टेडियम में प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर बढ़ा छात्रों का आक्रोश
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सुरक्षा बढ़ाने की प्रमुख वजह JPSC से जुड़ा ताजा विवाद माना जा रहा है। 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा की नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों के बीच फिर नाराजगी बढ़ी है। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने जिस आधार पर नियुक्तियों और परीक्षाओं को प्रभावित करने का फैसला लिया, उसे लेकर कई सवाल अभी भी कायम हैं। वहीं दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थी अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
24 जिलों में पुतला दहन का ऐलान
हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद JPSC-JSSC रिफॉर्म से जुड़े छात्र संगठनों ने सरकार के खिलाफ दोबारा आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठनों की ओर से राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने की घोषणा की गई है। रांची में अल्बर्ट एक्का चौक पर भी प्रदर्शन की तैयारी की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासन किसी भी तरह के बड़े जमावड़े को लेकर सतर्क है।
पुलिस गश्ती बढ़ी, स्टेडियम के आसपास बैरिकेडिंग
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। पुलिस वाहन और गश्ती दल लगातार इलाके में निगरानी कर रहे हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर बैरिकेडिंग के साथ लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है। 26 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान यही स्टेडियम छात्रों के लिए प्रमुख प्रदर्शन स्थल बन गया था। ऐसे में प्रशासन अब किसी भी नए जमावड़े को लेकर पहले से सतर्क नजर आ रहा है।
CGL मामले पर भी अभ्यर्थियों की नजर
JPSC विवाद के साथ-साथ JSSC CGL परीक्षा को लेकर चल रहे कानूनी मामले पर भी अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं। चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति हासिल की है और उनकी सेवा को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। अब आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और सरकार के अगले कदम से यह तय होगा कि छात्र आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है। फिलहाल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तालाबंदी और धारा 163 लागू किए जाने से साफ है कि प्रशासन किसी भी संभावित नए आंदोलन को लेकर पूरी तरह अलर्ट है। अगर छात्रों का आंदोलन दोबारा तेज होता है, तो उन्हें प्रदर्शन के लिए किसी दूसरे स्थान का रुख करना पड़ सकता है।






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