पिपरादामर जंगल में मिला जंगली हाथी का शव, मौत के कारण की जांच में जुटा वन विभाग
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा मौत का वास्तविक कारण, हाथी-मानव संघर्ष को लेकर ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
Garhwa News : रंका अनुमंडल मुख्यालय क्षेत्र के विश्रामपुर पंचायत अंतर्गत पिपरादामर जंगल में सोमवार की सुबह एक जंगली हाथी का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। जंगल में हाथी का शव मिलने की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल हाथी की मौत किस वजह से हुई, इसे लेकर वन विभाग किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
सुबह मिली हाथी की मौत की सूचना
गढ़वा जिला वन पदाधिकारी ईबिन बेनी इब्राहिम के अनुसार, वन विभाग को सोमवार सुबह करीब 8 बजे पिपरादामर जंगल में एक जंगली हाथी की मौत की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही विभाग की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। अधिकारियों और वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर हाथी के शव का निरीक्षण किया। घटनास्थल और उसके आसपास के क्षेत्र की भी जानकारी जुटाई जा रही है। वन विभाग के अधिकारी ललन कुमार सहित अन्य कर्मी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। विभाग की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि हाथी किन परिस्थितियों में मृत मिला और उसकी मौत के पीछे क्या कारण हो सकता है।
पोस्टमार्टम के बाद सामने आएगा मौत का कारण
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल हाथी की मौत को लेकर किसी एक कारण की पुष्टि नहीं की जा सकती है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत प्राकृतिक कारणों, बीमारी, चोट या किसी अन्य वजह से हुई है। वन विभाग घटनास्थल से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रहा है। आसपास के क्षेत्र में हाथी की गतिविधियों और संभावित खतरों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं हाथियों की मौत की घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार, विश्रामपुर पंचायत क्षेत्र में हाथियों की मौत का यह पहला मामला नहीं है। करीब चार-पांच वर्ष पहले इसी पंचायत के नया टोला क्षेत्र में भी जंगली हाथियों की मौत की घटना सामने आई थी। ग्रामीणों के मुताबिक, उस समय हाथियों की मौत बिजली के करंट की चपेट में आने की बात सामने आई थी। इसके अलावा भंवरी क्षेत्र में भी पूर्व में हाथियों की मौत की घटनाएं सामने आने की बात ग्रामीण बताते हैं। इन घटनाओं के कारण क्षेत्र में हाथियों की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को लेकर चिंता बनी हुई है।
रंका क्षेत्र में लगातार सामने आती है हाथियों की आवाजाही
रंका और आसपास के जंगल क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही देखी जाती रही है। कई बार हाथियों के झुंड जंगल से निकलकर ग्रामीण इलाकों और खेतों तक पहुंच जाते हैं। इस दौरान मक्का, धान और दूसरी फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायत ग्रामीण करते रहे हैं। फसल खराब होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। दूसरी ओर, हाथियों को गांवों और खेतों से दूर रखने की कोशिश में ग्रामीणों की सुरक्षा भी चुनौती बन जाती है।
पारंपरिक हाथी कॉरिडोर पर बढ़ी मानवीय गतिविधियां
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों के पारंपरिक आवागमन के रास्ते रहे हैं। समय के साथ जंगल और इन रास्तों के आसपास मानवीय गतिविधियां बढ़ी हैं। खेती, मकान और अन्य निर्माण के कारण हाथियों के पुराने रास्तों पर दबाव बढ़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथी अक्सर अपने पारंपरिक मार्गों से ही एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र की ओर जाते हैं। जब इन रास्तों पर मानव बस्तियां या खेती होती है तो हाथियों और ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है। ऐसे में वन्यजीवों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
ग्रामीणों ने की ठोस संरक्षण व्यवस्था की मांग
पिपरादामर और आसपास के ग्रामीणों ने वन विभाग से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल हाथियों के गांव में पहुंचने के बाद उन्हें भगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों ने हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों की पहचान और सुरक्षा, जंगल क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने तथा लोगों को हाथियों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने की मांग की है। इसके साथ ही बिजली के तारों और अन्य संभावित खतरनाक स्थानों की नियमित निगरानी की आवश्यकता भी बताई गई है, ताकि करंट की चपेट में आने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल पिपरादामर जंगल में जंगली हाथी की मौत के मामले में वन विभाग की जांच जारी है। हाथी के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है। वन विभाग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि हाथी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल है और अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा वन विभाग की जांच के निष्कर्ष पर है।
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