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गुजरात HC में केजरीवाल को झटका, PM मोदी की डिग्री मामले में ₹25 हजार की लागत कायम

PM Modi Degree Case

डिवीजन बेंच ने 2023 के सिंगल जज के आदेश में दखल से किया इनकार, CIC के निर्देश को भी बरकरार नहीं रखा

अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अपील गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। 29 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. राय की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के 2023 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही केजरीवाल पर लगाई गई ₹25,000 की लागत भी बरकरार रही। यह मामला 2016 से चल रहा है और इसका केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी को RTI के तहत सार्वजनिक किए जाने की मांग थी।

2016 में CIC तक पहुंचा था मामला
मामले की शुरुआत 2016 में हुई थी। केंद्रीय सूचना आयोग यानी CIC के समक्ष कार्यवाही के दौरान अरविंद केजरीवाल की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। CIC ने अप्रैल 2016 में दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय से प्रधानमंत्री की डिग्री से संबंधित रिकॉर्ड तलाशने और उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद गुजरात विश्वविद्यालय ने CIC के आदेश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी।

2023 में सिंगल जज ने CIC का आदेश रद्द किया
मार्च 2023 में गुजरात हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने CIC के 2016 के निर्देश को रद्द कर दिया था। अदालत ने मामले में केजरीवाल पर ₹25,000 की लागत भी लगाई थी। सिंगल जज के आदेश के खिलाफ केजरीवाल ने डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की। मौजूदा अपील में उनके वकील ने मुख्य रूप से सिंगल जज के फैसले में उनके आचरण को लेकर की गई टिप्पणियों और ₹25,000 की लागत को चुनौती दी थी। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, अपील की सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से मूल CIC आदेश को चुनौती देने के बजाय मुख्य रूप से इन्हीं टिप्पणियों और लागत पर आपत्ति की गई।

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हाईकोर्ट ने ₹25 हजार की लागत बरकरार रखी
29 सितंबर को गुजरात हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए सिंगल जज के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इसके साथ ही ₹25,000 की लागत भी बरकरार रही। अदालत ने यह भी कहा कि CIC जिस तरीके से इस मामले में आगे बढ़ा था, वह RTI Act की धारा 6(1) की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। अदालत ने शैक्षणिक रिकॉर्ड को RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत संरक्षित व्यक्तिगत जानकारी के रूप में भी माना।

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डिग्री की प्रामाणिकता पर कोर्ट के फैसले को लेकर क्या स्थिति है?
इस मामले को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। गुजरात हाईकोर्ट का 29 सितंबर 2026 का फैसला मुख्य रूप से RTI के जरिए प्रधानमंत्री की शैक्षणिक जानकारी के खुलासे और CIC के आदेश की वैधता से संबंधित है। कोर्ट ने यह नहीं कहा कि उसने इस अपील में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री की प्रामाणिकता की स्वतंत्र जांच कर उसे प्रमाणित किया है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि CIC का 2016 का आदेश कानूनी रूप से टिकता है या नहीं और सिंगल जज द्वारा लगाई गई ₹25,000 की लागत में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए या नहीं।

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कोर्ट ने शैक्षणिक रिकॉर्ड को निजी जानकारी माना
डिवीजन बेंच ने कहा कि शैक्षणिक रिकॉर्ड व्यक्तिगत जानकारी की श्रेणी में आते हैं और इस मामले में RTI के तहत उन्हें सार्वजनिक करने का पर्याप्त बड़ा जनहित स्थापित नहीं हुआ। अदालत ने RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) का उल्लेख करते हुए कहा कि संबंधित रिकॉर्ड को इस मामले में सार्वजनिक करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

अब ₹25 हजार की लागत रहेगी कायम
गुजरात हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद 2023 में सिंगल जज द्वारा लगाई गई ₹25,000 की लागत बरकरार है। डिवीजन बेंच ने केजरीवाल की अपील को खारिज करते हुए सिंगल जज के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े RTI विवाद में गुजरात हाईकोर्ट का ताजा फैसला CIC के आदेश और सूचना के सार्वजनिक खुलासे की कानूनी मांग पर केंद्रित है, न कि डिग्री की प्रामाणिकता की किसी नई न्यायिक जांच पर।

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