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730 ग्राम के शिशु को रानी हॉस्पिटल ने दी नई जिंदगी, 126 दिन बाद स्वस्थ होकर घर रवाना

Rani Hospital Ranchi

रांची: रांची के रानी हॉस्पिटल में एक अत्यंत समयपूर्व जन्मे शिशु का जटिल उपचार सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। अस्पताल के अनुसार, जन्म के समय महज 730 ग्राम वजन वाले इस शिशु की जिंदगी के दूसरे दिन ही भोजन नली की गंभीर जन्मजात विकृति की सर्जरी की गई। इसके बाद करीब 126 दिनों तक NICU और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल के बाद शिशु की स्थिति में संतोषजनक सुधार हुआ है और उसका वजन बढ़कर लगभग 1,540 ग्राम हो गया है। रानी हॉस्पिटल के अनुसार, इस उपचार में पीडियाट्रिक सर्जरी, नियोनेटोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, इंटेंसिव केयर और प्रशिक्षित नर्सिंग टीम सहित कई विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय रहा।

28 सप्ताह में हुआ था जन्म
अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, शिशु जुड़वां बच्चों में से एक है। उसका जन्म रांची के लक्ष्मी नर्सिंग होम में गर्भावस्था के करीब 28वें सप्ताह में हुआ था। मां में समय से पहले पानी की थैली फटने यानी Premature Rupture of Membranes (PROM) के कारण बच्चों का जन्म समय से काफी पहले हुआ। जन्म के समय शिशु का वजन केवल 730 ग्राम था। जांच में उसमें Esophageal Atresia with Tracheoesophageal Fistula (EA with TEF) की गंभीर जन्मजात विकृति पाई गई। इस स्थिति में भोजन नली का सामान्य मार्ग बाधित रहता है और भोजन नली तथा श्वसन नली के बीच असामान्य संपर्क हो सकता है। अस्पताल के अनुसार, शिशु की अत्यंत कम उम्र और बेहद कम जन्म वजन के बावजूद सर्जरी को टालना संभव नहीं था।

जन्म के दूसरे दिन हुई जीवनरक्षक सर्जरी
रानी हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. मो. इमरान ने शिशु की जन्म के दूसरे दिन जीवनरक्षक सर्जरी की। इतनी कम उम्र और वजन वाले शिशु में जटिल सर्जरी के बाद लंबे समय तक अत्यंत सावधानीपूर्वक निगरानी की आवश्यकता थी। सर्जरी के बाद डॉ. राजेश कुमार, डॉ. किरण और डॉ. शुभा के नेतृत्व में बहुविषयक चिकित्सकीय टीम ने शिशु की नियोनेटल और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की। इस टीम में पीडियाट्रिक सर्जन, नियोनेटोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, इंटेंसिविस्ट, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और NICU के अन्य सदस्य शामिल रहे।

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60 दिनों तक दी गई श्वसन सहायता
अस्पताल के मुताबिक, सर्जरी के बाद शिशु को लंबे समय तक श्वसन सहायता की जरूरत पड़ी। करीब 25 दिनों तक एंडोट्रेकियल मैकेनिकल वेंटिलेशन दिया गया। इसके बाद लगभग 35 दिनों तक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटरी सपोर्ट जारी रहा। इस दौरान NICU टीम ने शिशु की सांस लेने की क्षमता, पोषण, संक्रमण के जोखिम, ऑपरेशन के बाद की रिकवरी और वजन बढ़ने समेत समयपूर्व जन्म से जुड़ी विभिन्न चिकित्सकीय जटिलताओं की लगातार निगरानी की।

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126 दिनों की गहन चिकित्सा के बाद बढ़ा वजन
रानी हॉस्पिटल के अनुसार, करीब 126 दिनों के अस्पताल प्रवास के बाद शिशु की स्थिति में संतोषजनक सुधार हुआ। जन्म के समय 730 ग्राम वजन वाला शिशु अब लगभग 1,540 ग्राम का हो चुका है। अस्पताल से छुट्टी के समय चिकित्सकीय टीम ने नियमित फॉलो-अप और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह जारी रखने की बात कही है।

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इलाज से पहले माता-पिता को समझाई गई थी गंभीर स्थिति
अस्पताल के अनुसार, उपचार शुरू होने से पहले माता-पिता को शिशु की अत्यंत गंभीर स्थिति, बेहद कम जन्म वजन, समयपूर्व जन्म, जन्मजात विकृति और शुरुआती दिनों में बड़ी सर्जरी से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी। चिकित्सकीय चुनौतियों के बावजूद माता-पिता ने उपचार टीम पर भरोसा बनाए रखा। अस्पताल का कहना है कि इस लंबे उपचार के दौरान माता-पिता का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।

डॉक्टरों और नर्सिंग टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, 730 ग्राम वजन वाले अत्यंत समयपूर्व शिशु की शुरुआती अवस्था में जटिल सर्जरी और उसके बाद लंबे समय तक NICU प्रबंधन एक बहुविषयक टीम के समन्वित प्रयास का परिणाम रहा। चार महीने से अधिक समय तक चले उपचार के दौरान डॉक्टरों के साथ नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और अन्य स्वास्थ्यकर्मी लगातार शिशु की देखभाल में शामिल रहे। अस्पताल ने इसे किसी एक चिकित्सक की उपलब्धि के बजाय पूरी चिकित्सा टीम और परिवार के संयुक्त प्रयास का परिणाम बताया।

रानी हॉस्पिटल में 50 से अधिक विशेषज्ञों की टीम
अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, रानी हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक्स, नियोनेटोलॉजी और पीडियाट्रिक सर्जरी सहित विभिन्न विशेषज्ञताओं के 50 से अधिक डॉक्टरों की बहुविषयक टीम कार्यरत है। अस्पताल के मुताबिक, यह टीम गंभीर रूप से बीमार नवजात और बच्चों के उपचार के लिए चौबीसों घंटे सेवाएं उपलब्ध कराती है। रानी हॉस्पिटल ने बताया कि यहां झारखंड और आसपास के राज्यों से गंभीर स्थिति वाले नवजात और बच्चों को उपचार के लिए लाया जाता है।

DNB और DrNB प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित
अस्पताल के अनुसार, रानी हॉस्पिटल को National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग के लिए मान्यता प्राप्त है। अस्पताल की ओर से बताया गया कि वर्ष 2019 से DNB/DrNB प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें DNB Paediatrics और DrNB Neonatology भी शामिल हैं। अस्पताल के मुताबिक, प्रतिवर्ष करीब 14 पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षु अपने संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे करते हैं। अस्पताल प्रबंधन इसे क्लिनिकल सेवाओं के साथ मेडिकल शिक्षा और विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण से जोड़कर देखता है।

नवजात चिकित्सा में समन्वित देखभाल का उदाहरण
730 ग्राम वजन वाले अत्यंत समयपूर्व शिशु का लंबा उपचार यह दर्शाता है कि ऐसे जटिल मामलों में सर्जरी के साथ-साथ लगातार नियोनेटल सपोर्ट, पोषण प्रबंधन, संक्रमण से बचाव और विशेषज्ञ निगरानी की आवश्यकता होती है। रानी हॉस्पिटल के अनुसार, इस मामले में जन्म के दूसरे दिन की सर्जरी से लेकर 126 दिनों की गहन चिकित्सा तक विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से शिशु की स्थिति में सुधार संभव हुआ। अब आवश्यक चिकित्सकीय सलाह और नियमित फॉलो-अप के साथ शिशु को अस्पताल से घर भेजा जा रहा है।

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