अभिजीत दिपके बोले- नेपाल-बांग्लादेश से न करें CJP आंदोलन की तुलना, दिवाली तक समर्थकों को प्रदर्शन से दूर रहने की अपील
गांधीवादी सत्याग्रह बताकर आंदोलन को दी अलग पहचान
दिवाली तक समर्थकों से प्रदर्शन से दूर रहने की अपील
नई दिल्ली: CJP नेता अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन की तुलना नेपाल-बांग्लादेश में हुए आंदोलनों से नहीं की जानी चाहिए। दिपके ने CJP कार्यकर्ताओं के जेल जाने को गांधीवादी सत्याग्रह बताते हुए कहा कि कार्यकर्ता जेल से बाहर आने के बाद फिर से प्रदर्शन करेंगे। दिपके का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पिछले कुछ दिनों से CJP से जुड़े प्रदर्शन और उसके कार्यकर्ताओं की हिरासत/गिरफ्तारी को लेकर चर्चा बनी हुई है। उन्होंने अपने समर्थकों से फिलहाल प्रदर्शन से दूर रहने और दिवाली तक परिवार के साथ समय बिताने की अपील भी की।
‘नेपाल-बांग्लादेश से हमारे आंदोलन की तुलना न करें’
अभिजीत दिपके ने कहा कि CJP का आंदोलन अपने तरीके का आंदोलन है और इसकी तुलना नेपाल या बांग्लादेश में हुए आंदोलनों से करना उचित नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। दिपके ने CJP कार्यकर्ताओं के जेल जाने को भी इसी संदर्भ में गांधीवादी सत्याग्रह बताया। उनके मुताबिक, जेल जाना आंदोलन के रास्ते में आने वाली एक चुनौती है और कार्यकर्ता बाहर आने के बाद फिर से प्रदर्शन में शामिल होंगे।
‘जेल से बाहर आकर फिर करेंगे प्रदर्शन’
CJP नेता ने कहा कि जेल जाने से आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, जिन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या जेल भेजा गया है, उनके बाहर आने के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। दिपके के बयान से स्पष्ट है कि CJP अपने आंदोलन को तत्काल समाप्त करने के बजाय फिलहाल एक विराम देने की रणनीति अपना रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे की गतिविधियां परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएंगी।
दिवाली तक समर्थकों से प्रदर्शन से दूर रहने की अपील
अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों से दिवाली तक किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं होने और परिवार के साथ समय बिताने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 दिनों के दौरान आंदोलन से जुड़े समर्थकों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। लगातार प्रदर्शन और उससे जुड़ी कार्रवाई का असर उनके परिवारों पर भी पड़ा है। दिपके ने समर्थकों के परिवारों की चिंता का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय उन्हें अपने परिवार के साथ रहना चाहिए और त्योहार परिवार के साथ मनाना चाहिए।
‘परिवार भी चिंतित हैं’
दिपके के मुताबिक, पिछले दिनों की घटनाओं से आंदोलन में शामिल लोगों के परिवार भी चिंतित हुए हैं। ऐसे में उन्होंने समर्थकों से कुछ समय के लिए राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाकर परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। उन्होंने संकेत दिया कि यह आंदोलन से स्थायी दूरी नहीं है, बल्कि फिलहाल कार्यकर्ताओं को राहत देने और परिवार के साथ समय बिताने का मौका देने का फैसला है।
गांधीवादी सत्याग्रह बताकर आंदोलन को दी अलग पहचान
CJP कार्यकर्ताओं के जेल जाने को गांधीवादी सत्याग्रह बताने के जरिए अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन की वैचारिक दिशा को भी स्पष्ट करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना है। जेल जाने को भी उन्होंने इसी संघर्ष का हिस्सा बताया है। हालांकि, प्रशासन और पुलिस की ओर से आंदोलन से जुड़ी कार्रवाई को किस आधार पर किया गया और विभिन्न मामलों में गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ क्या कानूनी धाराएं लगाई गई हैं, इसका आकलन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।
आगे क्या होगा?
दिवाली तक प्रदर्शन से दूर रहने की अपील के बाद अब CJP की अगली रणनीति पर नजर रहेगी। दिपके ने साफ संकेत दिया है कि यह विराम स्थायी नहीं है और समर्थकों के साथ आगे आंदोलन जारी रखने की योजना है। ऐसे में आने वाले दिनों में CJP की ओर से अगली घोषणा और प्रदर्शन की रणनीति महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल दिपके ने समर्थकों से संयम बरतने, परिवार के साथ समय बिताने और दिवाली तक प्रदर्शन से दूर रहने की अपील की है।
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