जंतर-मंतर पर फिर शुरू हुआ CJP का प्रदर्शन, संसद मार्च पर अड़ी पार्टी; सोनम वांगचुक का अनशन जारी, राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर एक बार फिर राजनीतिक और छात्र आंदोलन का केंद्र बन गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने समर्थकों के साथ दोबारा मंच तैयार कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अपने घोषित ‘संसद चलो’ कार्यक्रम से पीछे हटने वाली नहीं है। इस बीच आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन जारी है, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आंदोलन और छात्रों के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
फिर बना मंच, संसद मार्च पर अड़ी CJP
जंतर-मंतर पर समर्थकों ने दोबारा मंच तैयार कर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। पार्टी नेता अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और कार्यकर्ता आज भी संसद की ओर मार्च करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात का कोई फायदा नहीं हुआ।”नड्डा से मिलना समय की बर्बादी थी। अब अगर बातचीत करनी है तो सरकार खुद जंतर-मंतर आए।” पार्टी का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से जारी किया हस्तलिखित संदेश
सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने हस्तलिखित संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है। वांगचुक ने लिखा कि उनका उपवास तब तक जारी रहेगा जब तक—आंदोलनकारी छात्र नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती, या फिर उन्हें स्वयं अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी जाती। उन्होंने अपील की कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखा जाए।
संसद मार्च के दौरान हिंसा, 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल
दिल्ली पुलिस के अनुसार, संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों और हिंसक घटनाओं में 50 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए हैं। घायलों में दिल्ली पुलिस के जवान, पैरामिलिट्री फोर्स के कर्मी,आईपीएस अधिकारी,DANIPS कैडर के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार लगभग 10 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी ड्यूटी के दौरान घायल हुए। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
केंद्र सरकार ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक
आंदोलन के लगातार बढ़ते स्वरूप को देखते हुए केंद्र सरकार भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई जिसमें आंदोलन की स्थिति, संसद सत्र पर उसके संभावित प्रभाव और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक के बाद एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि—”जंतर-मंतर पर जो लोग आंदोलन कर रहे हैं, उनमें बड़ी संख्या राजनीतिक कार्यकर्ताओं की है। असली छात्र तो NEET के बाद अपनी अगली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट चुके हैं।” सरकार का मानना है कि आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
आईबी प्रमुख और गृह सचिव की बैठक
सूत्रों के अनुसार आंदोलन की स्थिति को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) प्रमुख और केंद्रीय गृह सचिव के बीच भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक मेंराजधानी की सुरक्षा,संसद परिसर की व्यवस्था,प्रदर्शनकारियों की गतिविधियां,विभिन्न राज्यों में आंदोलन के फैलने की संभावना, पर विस्तार से चर्चा की गई। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान में कहा—”छात्रों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है, लेकिन पेपर लीक के गुनहगार आज भी खुले घूम रहे हैं।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा—”सरकार पेपर लीक के दोषियों से एक इस्तीफा तक नहीं ले सकती। नरेंद्र मोदी देश के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री साबित हुए हैं।”राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से संवाद और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
आंदोलन ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
संसद सत्र के बीच यह आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक ओर CJP और छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को संसद औरसड़क दोनों जगह उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार की ओर से फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो। छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा की जाए। आंदोलनकारी प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने दिया जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल क्या है स्थिति?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आंदोलनकारी संसद मार्च की तैयारी में हैं, जबकि सरकार स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है।
आने वाले दिनों में यह आंदोलन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।






