गढ़वा के रानी चेरी वनरोपण क्षेत्र में 77वें वन महोत्सव का भव्य शुभारंभ, विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी बोले- ‘जंगल बचेंगे तो भविष्य बचेगा’
वन महोत्सव के साथ हरित भविष्य का संकल्प, हजारों को दिया संदेश
पेड़ लगाइए, पर्यावरण बचाइए, विधायक की अपील
गढ़वा/रंका/चिनिया: प्रकृति संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प के साथ गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल अंतर्गत चिनिया प्रखंड स्थित रानी चेरी वनरोपण क्षेत्र में सोमवार को 77वें वन महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया। वन विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया गया। समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ईबीन बेनी अब्राहम तथा दक्षिणी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी अजय टोप्पो ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद अतिथियों ने पौधारोपण कर हरित झारखंड और स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया। वन महोत्सव के दौरान पूरा परिसर “पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ” और “हरियाली ही खुशहाली है” जैसे नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की सुरक्षा और संरक्षण का भी सामूहिक संकल्प लिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ कार्यक्रम का आगाज
कार्यक्रम की शुरुआत कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं तथा प्रभु प्रकाश उच्च विद्यालय, जमुनियाटांड़ की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई। छात्राओं की आकर्षक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्साह, संस्कृति और देशभक्ति के रंगों से भर दिया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। इसके बाद मुख्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया।

वन महोत्सव का इतिहास बताते हुए विधायक ने दिया बड़ा संदेश
मुख्य अतिथि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि वन महोत्सव की शुरुआत 1 जुलाई 1950 को देशभर में वनों के संरक्षण और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। पिछले सात दशकों से अधिक समय से यह अभियान देश के हर राज्य में चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, सूखा, बाढ़, अनियमित वर्षा और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन सभी समस्याओं का सबसे प्रभावी समाधान अधिक से अधिक वृक्षारोपण और जंगलों का संरक्षण है। उन्होंने कहा कि यदि आज हम प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।
“जंगल केवल पेड़ नहीं, जीवन का आधार हैं”
विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि जंगल केवल लकड़ी या वन उत्पाद प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं। वे संपूर्ण मानव जीवन और पृथ्वी के अस्तित्व का आधार हैं। उन्होंने कहा कि जंगल पृथ्वी का तापमान नियंत्रित करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं, नदियों और जल स्रोतों को जीवित रखते हैं। जंगल लाखों जीव-जंतुओं का घर हैं और औषधीय पौधों का भंडार हैं। साथ ही जंगल किसानों की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जंगल खत्म हो जाएंगे तो जल संकट, खाद्यान्न संकट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं और गंभीर हो जाएंगी।
महुआ की तरह हर पेड़ की रक्षा करें
विधायक ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रामीण समाज महुआ के पेड़ को अत्यंत सम्मान देता है और उसे कल्पवृक्ष मानकर उसकी रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग महुआ को काटने से बचते हैं, उसी तरह आम, पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, साल, सागवान और अन्य फलदार एवं औषधीय वृक्षों का भी संरक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक परिपक्व पेड़ बनने में वर्षों लग जाते हैं, इसलिए केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है। उसकी देखभाल करना और उसे सुरक्षित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

हर व्यक्ति एक पौधा लगाए, परिवार की तरह उसकी देखभाल करे
अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को वर्ष में कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसे परिवार के सदस्य की तरह बड़ा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति हर वर्ष केवल एक पौधा भी लगाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपने बच्चों के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, राष्ट्रीय पर्व और अन्य विशेष अवसरों पर भी पौधारोपण करने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियानों का किया उल्लेख
विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें हरित आवरण बढ़ाने, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने लोगों से इन अभियानों का हिस्सा बनने और अपने गांवों को हराभरा बनाने की अपील की।
वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधारोपण नहीं, पौधों को जीवित रखना भी है
जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ईबीन बेनी अब्राहम ने कहा कि वन विभाग हर वर्ष लाखों पौधे लगाता है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी मिलेगी जब लगाए गए पौधे जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा कि वन विभाग अब सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दे रहा है। ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूहों, स्कूलों और पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़कर पौधों की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वृक्षारोपण जरूरी
दक्षिणी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी अजय टोप्पो ने कहा कि वन महोत्सव केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद करने का अवसर है। उन्होंने प्रत्येक परिवार से कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का आग्रह किया।
जनप्रतिनिधियों ने भी किया पर्यावरण संरक्षण का आह्वान
इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य मुरारी यादव, चिनिया प्रखंड प्रमुख सुनैना देवी, समाजसेवी फरीद अहमद खान, मुखिया गोपाल कुमार यादव, समाजसेवी महादेव सिंह, जिला परिषद सदस्य बनारसी सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और हरियाली देने के लिए आज से ही सामूहिक प्रयास शुरू करना होगा।
सामूहिक पौधारोपण बना कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम के अंत में विधायक, वन अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। वन विभाग की ओर से लोगों को पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, जैविक खाद के उपयोग और संरक्षण के तरीकों की जानकारी भी दी गई। सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि लगाए गए पौधों को नष्ट नहीं होने देंगे और नियमित रूप से उनकी देखभाल करेंगे।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ईबीन बेनी अब्राहम, दक्षिणी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी अजय टोप्पो, वनरक्षी शशिकांत कुमार, प्रधान वनरक्षी गौतम सागर टोप्पो, प्रधान वनरक्षी राजीव पांडेय, उत्तम कुमार रवि, असलम अंसारी, वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि, विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यदि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखा गया तो इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। जरूरत है कि प्रत्येक गांव, प्रत्येक विद्यालय और प्रत्येक परिवार इस अभियान का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि “एक व्यक्ति-एक पौधा” का संकल्प यदि पूरे समाज द्वारा अपनाया जाए, तो आने वाले वर्षों में झारखंड को अधिक हराभरा और पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध बनाया जा सकता है।
वन महोत्सव के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पेड़ केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि मानव जीवन, जलवायु संतुलन, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव भी हैं।






