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RBI बढ़ा सकता है Repo Rate, महंगी हो सकती है आपकी EMI! दिसंबर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अनुमान

RBI Repo Rate Hike

Union Bank की रिपोर्ट में दावा- 2026-27 की दूसरी छमाही में रेपो रेट 5.75-6% तक पहुंच सकता है

अक्टूबर में भी बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं

नई दिल्ली: देश की मजबूत आर्थिक रफ्तार के बीच आने वाले महीनों में होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI पर दबाव बढ़ सकता है। Union Bank of India की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नया चक्र शुरू कर सकता है। रिपोर्ट में मौजूदा 5.25 प्रतिशत रेपो रेट को बढ़ाकर 5.75 से 6 प्रतिशत तक किए जाने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, यह RBI का आधिकारिक फैसला नहीं बल्कि Union Bank का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, दरों में बढ़ोतरी दिसंबर 2026 से शुरू होने की संभावना ज्यादा है। बैंक ने 25-25 बेसिस पॉइंट की दो से तीन बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। मजबूत आर्थिक विकास, महंगाई का दबाव और वैश्विक स्तर पर कड़े वित्तीय हालात इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।

क्यों बढ़ सकता है ब्याज दरों का दबाव?
इस अनुमान के पीछे बैंकिंग सिस्टम में बढ़ती अतिरिक्त नकदी एक अहम वजह है। Union Bank की रिपोर्ट के अनुसार, RBI की विशेष स्वैप सुविधा के तहत 31 अगस्त तक करीब 136 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ। इसमें लगभग 127.23 अरब डॉलर FCNR(B) जमा के जरिए आए, जबकि बाकी राशि विदेशी मुद्रा उधारी और External Commercial Borrowings से जुड़ी रही। विदेशी मुद्रा के इस बड़े प्रवाह का असर बैंकिंग सिस्टम की रुपये वाली तरलता पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, कोर लिक्विडिटी जून के मध्य में 4.82 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अगस्त के मध्य तक 8.05 लाख करोड़ रुपये हो गई। एक अनुमानित परिदृश्य में इसके 11 सितंबर तक करीब 14.17 लाख करोड़ रुपये पहुंचने की संभावना जताई गई है।

यानी RBI के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि बाजार में मौजूद अतिरिक्त रुपये की नकदी को किस तरह नियंत्रित किया जाए, ताकि इसका असर महंगाई और वित्तीय स्थिरता पर न पड़े।

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पहले नकदी सोखेगा RBI, फिर बढ़ सकती हैं दरें
Union Bank का अनुमान है कि RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक से पहले ही अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से बाहर निकालने के उपाय कर सकता है। इसके लिए Variable Rate Reverse Repo (VRRR) और Incremental Cash Reserve Ratio (I-CRR) जैसे उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा बॉन्ड बिक्री और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसे विकल्प भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, RBI शुरुआत में ऐसे अस्थायी उपायों पर जोर दे सकता है जिन्हें बाद में क्रेडिट डिमांड बढ़ने पर वापस लिया जा सके।

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अक्टूबर में ही बढ़ सकता है Repo Rate?
हालांकि Union Bank का बेस-केस अनुमान दिसंबर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का है, लेकिन अक्टूबर में ही रेपो रेट बढ़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सितंबर में US Federal Reserve ब्याज दर बढ़ाता है और RBI पहले से ही अतिरिक्त नकदी को स्थायी उपायों के जरिए सोखने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो अक्टूबर में भी दरों में बदलाव संभव है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने पर भारत में महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में RBI के लिए मौद्रिक नीति को सख्त करने का दबाव और बढ़ सकता है। वहीं, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर केंद्रीय बैंक को कुछ अतिरिक्त नीति-लचीलापन मिल सकता है।

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आम लोगों पर क्या होगा असर?
अगर RBI वास्तव में रेपो रेट बढ़ाता है और बैंक उसका असर अपने लोन रेट पर डालते हैं, तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है। हालांकि, EMI पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित बैंक अपनी lending rates में कितना बदलाव करता है। फिलहाल RBI ने ऐसी कोई दर वृद्धि घोषित नहीं की है। इसलिए Union Bank की रिपोर्ट को एक संभावित भविष्यवाणी के तौर पर देखना चाहिए, न कि ब्याज दर बढ़ने का पक्का ऐलान।

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