ट्यूलिप हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित, IMA ने उठाए सवाल; डॉक्टर बोले- पहले अस्पताल को मिले अपना पक्ष रखने का मौका
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के कड़े रुख के बाद सिविल सर्जन ने की कार्रवाई
IMA ने बनाई जांच कमेटी
रांची: रिंग रोड स्थित ट्यूलिप हॉस्पिटल का लाइसेंस स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के कड़े रुख के बाद रांची सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने यह कार्रवाई की है। लाइसेंस निलंबन के बाद निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मामले को लेकर IMA भवन में डॉक्टरों की बैठक हुई, जिसमें IMA के पदाधिकारियों के साथ झासा अध्यक्ष डॉ. बिमलेश सिंह भी शामिल हुए। बैठक में डॉक्टरों ने ट्यूलिप हॉस्पिटल पर हुई कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अस्पताल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने की मांग की।
‘अस्पताल को अपना पक्ष रखने का मिलना चाहिए मौका’
रांची IMA के चेयरमैन डॉ. शेखर चौधरी ने कहा कि किसी अस्पताल का लाइसेंस सीधे निलंबित करना उचित प्रक्रिया नहीं है। उनका कहना है कि पहले अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाना चाहिए और उसके बाद जांच के आधार पर कार्रवाई का फैसला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में यदि किसी तरह की कमी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित प्रबंधन से उसका स्पष्टीकरण लिया जाना जरूरी है। IMA का मानना है कि कार्रवाई की प्रक्रिया में अस्पताल का पक्ष भी सामने आना चाहिए।
IMA ने बनाई जांच कमेटी
ट्यूलिप हॉस्पिटल के लाइसेंस निलंबन के मामले की पड़ताल के लिए IMA ने एक जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी अस्पताल प्रबंधन से उन सभी बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज मांगेगी, जिनके आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने लाइसेंस निलंबित किया है। कमेटी मंगलवार को रांची सिविल सर्जन से भी मुलाकात करेगी। इस दौरान IMA के प्रतिनिधि लाइसेंस निलंबन के कारणों और कार्रवाई की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी हासिल करेंगे। IMA का कहना है कि ट्यूलिप हॉस्पिटल के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई की गई है, उसे लेकर दूसरे निजी अस्पतालों में भी चिंता है। संगठन का तर्क है कि अस्पताल में किसी तरह की कमी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
मरीज और परिजनों से मारपीट का समर्थन नहीं
वहीं, झासा के चेयरमैन डॉ. बिमलेश सिंह ने स्पष्ट किया कि संगठन अस्पताल के लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, लेकिन मरीज या उनके परिजनों के साथ किसी भी तरह की मारपीट अथवा दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल में मरीज या उनके परिजनों के साथ गलत व्यवहार होता है, तो वे IMA से शिकायत कर सकते हैं। शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी और जरूरत के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। डॉ. बिमलेश सिंह ने कहा कि डॉक्टरों और मरीजों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों के साथ उचित व्यवहार भी महत्वपूर्ण है।
IMA की बैठक में कई डॉक्टर रहे मौजूद
IMA भवन में हुई बैठक में ट्यूलिप हॉस्पिटल मामले को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में डॉ. अनंत सिन्हा, डॉ. अभिषेक रामाधीन, डॉ. राजेश कुमार समेत कई डॉक्टर मौजूद रहे। अब मंगलवार को IMA की जांच कमेटी और सिविल सर्जन के बीच होने वाली मुलाकात पर नजर है। इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि स्वास्थ्य विभाग ने किन आधारों पर ट्यूलिप हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित किया और आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।
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