झारखंड में ₹1.60 लाख करोड़ के खर्च का हिसाब गायब? CAG रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

रांची: झारखंड सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश की गई CAG रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य गठन के बाद से 31 मार्च 2025 तक करीब ₹1.60 लाख करोड़ के सरकारी खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilisation Certificate) सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया है। इतनी बड़ी राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने पर CAG ने राशि के संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई है। हालांकि, उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित होना अपने आप में राशि के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं है, लेकिन इससे सरकारी खर्च की निगरानी और वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल जरूर खड़े होते हैं।
₹1.60 लाख करोड़ के खर्च का नहीं मिला उपयोगिता प्रमाण
वित्तीय वर्ष 2024-25 के वित्तीय प्रतिवेदन में सरकारी खर्च से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य गठन के बाद से 31 मार्च 2025 तक बड़ी मात्रा में खर्च की गई राशि के उपयोग का प्रमाण संबंधित विभागों की ओर से प्रस्तुत नहीं किया गया। नियमों के अनुसार किसी वित्तीय वर्ष में खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र अगले वित्तीय वर्ष में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस उद्देश्य के लिए सरकारी राशि जारी की गई थी, उसका इस्तेमाल उसी काम में हुआ है। लेकिन ₹1.60 लाख करोड़ जैसी विशाल राशि के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने से सरकारी खर्च की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

CAG ने जताई दुरुपयोग की आशंका
CAG की रिपोर्ट में उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने को लेकर चिंता जताई गई है। जब किसी सरकारी विभाग या एजेंसी की ओर से खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो यह सत्यापित करना मुश्किल हो जाता है कि राशि का वास्तविक इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ या नहीं। यही वजह है कि इतनी बड़ी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने को वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर घोटाला या राशि के गबन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों से प्राप्त दस्तावेज और आगे की जांच से ही स्पष्ट होगी।
₹4,531 करोड़ के AC Bill का भी नहीं मिला हिसाब
CAG रिपोर्ट में केवल उपयोगिता प्रमाण पत्र का मामला नहीं है। सरकारी खजाने से अग्रिम निकाली गई राशि के खर्च का पूरा विवरण यानी DC Bill उपलब्ध नहीं कराने का भी उल्लेख किया गया है। नियमों के तहत जरूरी सरकारी खर्चों के लिए ट्रेजरी से अग्रिम राशि यानी AC Bill के माध्यम से पैसा निकाला जा सकता है। लेकिन बाद में उस राशि के वास्तविक खर्च का विवरण DC Bill के जरिए देना जरूरी होता है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक ₹4,531 करोड़ की अग्रिम निकासी के खर्च का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया। यह स्थिति भी सरकारी वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है।
आखिर AC Bill और DC Bill क्यों जरूरी?
सरकारी वित्तीय व्यवस्था में AC Bill के माध्यम से अग्रिम राशि निकालने की व्यवस्था जरूरी परिस्थितियों में की जाती है। लेकिन यह पैसा अंतिम रूप से खर्च हो जाने के बाद उसके उपयोग का पूरा विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। DC Bill के जरिए यह स्पष्ट होता है कि अग्रिम निकाली गई राशि वास्तव में कहां और किस काम में खर्च की गई। ऐसे में बड़ी राशि के DC Bill लंबित रहने से वित्तीय निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

झारखंड की अर्थव्यवस्था में भी दर्ज हुई वृद्धि
CAG रिपोर्ट में राज्य की आर्थिक स्थिति से जुड़े सकारात्मक आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में झारखंड के GSDP में 2023-24 की तुलना में 10.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में झारखंड का देश के कुल GDP में योगदान 1.56 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में राज्य का राष्ट्रीय GDP में योगदान लगभग इसी स्तर के आसपास रहा है।

राजस्व में भी 7.46% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के राजस्व में भी वृद्धि दर्ज की गई। 2023-24 की तुलना में 2024-25 के दौरान झारखंड के राजस्व में 7.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानी एक तरफ राज्य की अर्थव्यवस्था और राजस्व में वृद्धि के आंकड़े सामने आए हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी खर्च के उपयोगिता प्रमाण पत्र और अग्रिम राशि के खर्च का विवरण लंबित रहने का मुद्दा भी सामने आया है।

वित्तीय पारदर्शिता पर अब बड़ा सवाल
CAG रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े अब झारखंड सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर बहस का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। ₹1.60 लाख करोड़ के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र और ₹4,531 करोड़ के AC Bill के खर्च का विवरण लंबित होना सरकारी विभागों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि सरकार इन लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र और DC Bill को कब तक उपलब्ध कराती है और CAG की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।






