लोकसभा से ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास

Taxation Bill 2026

विदेशी निवेश,मेक इन इंडिया और UPI में बड़े बदलाव की तैयारी

बिना चर्चा के पारित हुआ विधेयक, विदेशी निवेश बढ़ाने और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

dipika pandey sing
दीपक कुमार थाना प्रभारी रामगढ़ घाटों
द हॉप मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रांची रोड मरार रामगढ़
बिहार फाऊंडरी एंड कास्टिंग लिमिटेड इंडस्ट्रीज एरिया मरार रामगढ़
मां तारा सेवा समिति
मां सेवा यतन हॉस्पिटल
रजरप्पा थाना प्रभारी श्री कृष्ण कुमार
रमेश रविदास
रमेश सिंह
राधा गोविंद यूनिवर्सिटी लाल की घाटी रामगढ़
रोटरी रामगढ़ सिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श चौधरी
रोटेरियन हरीश चौधरी
होटल सम्राट गोला रोड
होटल तेजस
होटल ट्रीट थाना चौक रामगढ़
15 Aug 2026 poat Ads Ramgarh

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान भारी हंगामे के बीच लोकसभा ने ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ को पारित कर दिया। विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और इसे बिना बहस के ही मंजूरी दे दी गई। यह विधेयक अब Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 का स्थान लेगा और टैक्स व्यवस्था, विदेशी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़े कई अहम बदलावों का रास्ता खोलेगा।

सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य भारत को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना, ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति देना और कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही इसमें Payment and Settlement Systems Act, 2007 में भी संशोधन का प्रस्ताव शामिल है।

ccl.psd
Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school
Vedanta iron steel
आशुतोष सिंह कुज्जू थाना प्रभारी
झारखंड हॉस्पिटल
डीड राइटर रामगढ़ 1
थेरेपी वर्ल्ड स्पा
बागड़िया ब्रदर श्याम कंपलेक्स
प्रो केयर डेंटल क्लिनिक
पॉली डॉग हॉस्पिटल रांची
न्यू रामगढ़ टेंट हाउस
निवेदक श्री सदानंद कुमार
निवेदक नवीन प्रकाश पांडे थाना प्रभारी रामगढ़ थाना

विदेशी निवेश बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, बदलती सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माहौल में भारत के पास निवेश आकर्षित करने का बड़ा अवसर है। इसी को ध्यान में रखते हुए विधेयक में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। विधेयक के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन पर टैक्स राहत देने का प्रावधान किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, वित्तीय बाजार मजबूत होंगे और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

सेंट्रल हार्डवेयर
सतीश गुप्ता
श्री शंकर मिश्रा
श्री पंकज कुशवाहा
श्री कृष्ण विद्या मंदिर
श्री आजाद सिंह
अनिल शर्मा सर
किशन जयसवाल
गोविंद मेवाड़
छोटू सिंह
जॉनी अग्रवाल
डॉ. राकेश सिंह
तिलक राज मंगलम
बंटी मोदी
मनोज अग्रवाल
मुकेश राम
राजू गुप्ता उर्फ जयनारायण साहू
राहुल कुमार उर्फ सोनू

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा बूस्ट
विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना भी है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र के लिए उपलब्ध टैक्स छूट की अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, पर्सनल कंप्यूटर (PC) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण करने वाली वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश करने के लिए अधिक आकर्षित होंगी। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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डायमंड सेक्टर को भी मिलेगी राहत
विधेयक में हीरा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। विदेशी डायमंड माइनिंग कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और नीलामी से जुड़ी संस्थाओं को आयकर में विशेष राहत देने का प्रस्ताव है। सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 2041 तक टैक्स छूट का प्रावधान रखा है, ताकि भारत वैश्विक डायमंड ट्रेड और प्रोसेसिंग उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।

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क्या आम टैक्सपेयर्स पर होगा असर?
इस विधेयक से आम करदाताओं की आयकर दरों में फिलहाल कोई प्रत्यक्ष बदलाव नहीं किया गया है। यानी व्यक्तिगत आयकर स्लैब या टैक्स दरों पर इसका तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश बढ़ता है और उद्योगों का विस्तार होता है, तो इसका दीर्घकालिक लाभ रोजगार, औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों के रूप में आम नागरिकों तक पहुंच सकता है।

UPI और डिजिटल पेमेंट में हो सकता है बड़ा बदलाव
इस विधेयक का सबसे चर्चित प्रावधान UPI और डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़ा है। विधेयक में Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। यदि यह प्रावधान लागू होता है, तो वर्तमान में UPI, RuPay कार्ड और अन्य डिजिटल भुगतान पर लागू Zero MDR (Merchant Discount Rate) व्यवस्था में बदलाव संभव हो सकता है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में सरकार आवश्यकता पड़ने पर कुछ प्रकार के UPI लेन-देन पर MDR लागू करने का अधिकार प्राप्त कर सकती है।

क्या UPI पर लगेगा शुल्क?
फिलहाल इस विधेयक के पारित होने का अर्थ यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग जाएगा। लेकिन संशोधन के बाद सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह परिस्थितियों के अनुसार यह तय करे कि किस प्रकार के लेन-देन, कितनी राशि या किन श्रेणियों के भुगतान पर MDR लागू किया जाए। यानी भविष्य में यदि सरकार आवश्यक समझे, तो कुछ UPI लेन-देन पर शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि इसकी अंतिम रूपरेखा सरकार द्वारा अलग से तय की जाएगी।

अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश
सरकार का दावा है कि यह विधेयक केवल टैक्स कानूनों में संशोधन नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक निवेश और विनिर्माण का केंद्र बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा और डिजिटल भुगतान व्यवस्था में लचीलापन जैसे प्रावधानों के माध्यम से सरकार दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देना चाहती है।

अब इस विधेयक के कानून बनने के बाद इसके विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए सरकार समय-समय पर आवश्यक अधिसूचनाएं और नियम जारी करेगी।

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