बृजेश गंझू के बाद शशिकांत पर टिकी TSPC की कमान, सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी निगरानी

Shashikant Ganjhu

रांची/पलामू: वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में टीएसपीसी के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के मारे जाने के बाद प्रतिबंधित संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के नेतृत्व को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगाह अब शशिकांत गंझू पर टिक गई है। ताजा रिपोर्टों में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव निवासी शशिकांत को संगठन का प्रमुख और प्रमुख सक्रिय कमांडर बताया गया है। कुछ रिपोर्टों में उसे बृजेश के बाद संगठन का अघोषित चेहरा बताया गया है। शशिकांत पर झारखंड सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। वह एनआईए के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है। पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, झारखंड के पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग के अलावा उत्तर प्रदेश में भी उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज हैं।

वाराणसी में मारा गया बृजेश गंझू
20 सितंबर 2026 को वाराणसी के रामनगर इलाके में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में बृजेश गंझू मारा गया। वह टीएसपीसी का प्रमुख था और उस पर झारखंड सरकार तथा एनआईए की ओर से कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उसके खिलाफ बड़ी संख्या में आपराधिक मामले दर्ज थे और इनमें एनआईए से जुड़े मामले भी शामिल थे। बृजेश की मौत के बाद टीएसपीसी के नेतृत्व में खालीपन की स्थिति बनी है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, संगठन के कई वरिष्ठ कमांडर या तो जेल में हैं या मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। ऐसे में शशिकांत संगठन का सबसे प्रमुख सक्रिय कमांडर बनकर सामने आया है।

10 लाख का इनामी शशिकांत कौन है?
शशिकांत गंझू मूल रूप से पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का रहने वाला बताया जाता है। पुलिस के अनुसार, वह 2000 के दशक में माओवादी संगठन से जुड़ा था। बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद टीएसपीसी में शामिल हुआ। उसका मुख्य प्रभाव क्षेत्र पलामू और चतरा बताया जाता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वह अत्याधुनिक हथियारों के साथ सक्रिय रहता है और उसके खिलाफ झारखंड तथा उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक मामले दर्ज हैं।

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13 मुठभेड़ों में बच निकलने का पुलिस दावा
शशिकांत को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में मुठभेड़ों का भी उल्लेख मिलता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि 2010 के बाद वह करीब 13 मुठभेड़ों में बच निकलने में सफल रहा है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में दो दर्जन से अधिक मुठभेड़ों का उल्लेख है। इसलिए मुठभेड़ों की संख्या को पुलिस/सुरक्षा सूत्रों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव में सुरक्षा बलों और टीएसपीसी उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में शशिकांत बच निकलने में सफल रहा था, जबकि दो पुलिस जवान शहीद हुए थे।

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बृजेश के बाद संगठन के सामने नेतृत्व का संकट
बृजेश गंझू की मौत ने टीएसपीसी के सामने नेतृत्व का संकट और गहरा कर दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन के कई वरिष्ठ कमांडरों के मारे जाने या गिरफ्तार होने के बाद शशिकांत अब संगठन का एकमात्र प्रमुख सक्रिय चेहरा रह गया है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा रही हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की निगाह इस बात पर है कि बृजेश के बाद टीएसपीसी का नेटवर्क किस तरह काम करता है और क्या संगठन के बचे हुए कैडर शशिकांत के नेतृत्व में फिर से सक्रिय होने की कोशिश करते हैं।

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उत्तर प्रदेश कनेक्शन भी जांच के दायरे में
शशिकांत की गतिविधियों को लेकर झारखंड के साथ उत्तर प्रदेश की एजेंसियां भी सतर्क हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में भी मामले दर्ज हैं। बृजेश गंझू के वाराणसी में मारे जाने के बाद टीएसपीसी से जुड़े नेटवर्क और उसके सहयोगियों की गतिविधियां भी सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। वाराणसी में बृजेश के एनकाउंटर के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां उसके संगठन से जुड़े बचे हुए नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम में शशिकांत गंझू की भूमिका पर विशेष नजर रखी जा रही है।

अब शशिकांत पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद शशिकांत गंझू का नाम टीएसपीसी के सबसे प्रमुख बचे हुए कमांडर के रूप में सामने आया है। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम है और एनआईए मामलों में भी उसके वांटेड होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि शशिकांत ने औपचारिक रूप से संगठन का सुप्रीमो पद संभाल लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों में उसे प्रमुख सक्रिय कमांडर और अघोषित नेतृत्व का चेहरा बताया गया है। आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और संगठन की गतिविधियों से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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