सरला बिरला स्कूल में ‘वात्सल्यम् 2026’ की धूम, बच्चों ने संस्कारों की धरोहर को दी शानदार प्रस्तुति
रांची: सरला बिरला पब्लिक स्कूल, रांची में बुधवार को नर्सरी, केजी-वन और केजी-टू के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों के लिए ‘वात्सल्यम् 2026 – ग्रैंडपेरेंट्स डे-टू’ का आयोजन हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘धरोहर – द लेगेसी ऑफ वैल्यूज’ रखी गई, जिसके माध्यम से दादा-दादी और नाना-नानी के योगदान तथा पीढ़ियों से चले आ रहे जीवन-मूल्यों को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में रांची की माननीय महापौर श्रीमती रोशनी खलखो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
मैत्री बंधन और दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
समारोह की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं अभिनंदन से हुई। इसके बाद मैत्री बंधन और दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। नन्हे विद्यार्थियों की गणेश वंदना और स्वागत गीत-नृत्य ने कार्यक्रम को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। विद्यालय के हेड बॉय ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर विद्यालय की उपलब्धियों और महत्वपूर्ण पड़ावों की जानकारी दी इसके बाद नन्हे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए कार्यक्रम की थीम को जीवंत कर दिया।

‘वैल्यू ट्री’ ने दिया संस्कारों का संदेश
नर्सरी के विद्यार्थियों ने ‘वैल्यू ट्री’ की प्रस्तुति दी। इसके माध्यम से एकता, सत्य और दयालुता जैसे मूल्यों को बचपन से विकसित करने का संदेश दिया गया। वहीं ‘ए काइंडनेस हीरो’ गीत के जरिए बच्चों ने बताया कि दूसरों की मदद करना, चीजें साझा करना, मधुर शब्दों का इस्तेमाल करना और जरूरतमंद की देखभाल करना जैसे छोटे-छोटे कार्य भी समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
सत्य, सहानुभूति और मानवता की झलक
केजी-वन ए के बच्चों ने सत्यनिष्ठा को अपनी प्रस्तुति का विषय बनाया। बच्चों ने सही बोलने और सही कार्य करने के महत्व को रेखांकित किया। केजी-वन बी ने सहानुभूति के भाव को प्रस्तुत किया। बच्चों ने दूसरों की भावनाओं को समझने, भिन्नताओं का सम्मान करने और दयालु व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। वहीं केजी-टू के विद्यार्थियों ने भी अलग-अलग जीवन-मूल्यों को मंच पर खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
- केजी-टू ए — मानवता
- केजी-टू बी — सम्मान
- केजी-टू सी — साहस
- केजी-टू डी — क्षमा
- केजी-टू ई — कृतज्ञता
इन प्रस्तुतियों के जरिए यह संदेश दिया गया कि जीवन-मूल्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार और रिश्तों में भी दिखाई देने चाहिए।

जन्माष्टमी ने बढ़ाई सांस्कृतिक रंगत
कार्यक्रम में विशेष जन्माष्टमी उत्सव का भी आयोजन किया गया। इस प्रस्तुति ने समारोह में भक्ति, उल्लास और भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक पेश की। नन्हे विद्यार्थियों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास इस प्रस्तुति में साफ दिखाई दिया।

महापौर रोशनी खलखो ने की विद्यालय की सराहना
मुख्य अतिथि श्रीमती रोशनी खलखो ने कार्यक्रम की विषयवस्तु की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों में जीवन-मूल्यों का विकास बचपन से ही होना बेहद जरूरी है।उन्होंने दादा-दादी और नाना-नानी को पीढ़ियों के बीच जीवंत सेतु बताते हुए पारिवारिक रिश्तों, संस्कारों और सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यालय द्वारा बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार और जीवन-मूल्यों से जोड़ने के प्रयास की भी प्रशंसा की।
‘धरोहर’ सिर्फ संपत्ति नहीं, संस्कार भी हैं: प्राचार्या
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मनीषा शर्मा ने कहा कि ‘वात्सल्यम् 2026’ की थीम ‘धरोहर – द लेगेसी ऑफ वैल्यूज’ उस विरासत का उत्सव है, जो दादा-दादी और नाना-नानी अगली पीढ़ी को देते हैं। उन्होंने कहा कि यह विरासत सिर्फ भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, संस्कार, परंपराएं और जीवन-मूल्य हैं। प्राचार्या ने कहा कि जब बच्चे कम उम्र से ही सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, मानवता, सम्मान, साहस, क्षमा, कृतज्ञता और दयालुता जैसे मूल्यों को अपनाते हैं, तो वे परिवार और समाज की बेहतर विरासत को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास और पीढ़ियों के बीच रिश्तों को मजबूत करने के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
प्रेम और संस्कारों की यादगार बनी शाम
कार्यक्रम का समापन वोट ऑफ थैंक्स, स्कूल सॉन्ग और राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। ‘वात्सल्यम् 2026’ ने बच्चों और उनके दादा-दादी एवं नाना-नानी के बीच प्रेम, स्नेह और अपनत्व को और मजबूत किया। नन्हे विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि आधुनिक समय में भी संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों की विरासत उतनी ही महत्वपूर्ण है। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच प्रेम, संस्कार और अनुभवों के हस्तांतरण का भावपूर्ण उत्सव बनकर सामने आया।






