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आरा में जच्चा-बच्चा की मौत से बवाल: निजी अस्पताल में तोड़फोड़ और आगजनी, परिजनों का फूटा गुस्सा

Childbirth negligence

इलाज में लापरवाही के आरोप, परिजनों का आक्रोश भड़का

बिहार: बिहार के आरा शहर के नवादा थाना क्षेत्र स्थित चंदवा मोड़ पर एक निजी अस्पताल में रविवार की शाम उस समय अफरातफरी मच गई जब प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा, तोड़फोड़ और आगजनी की। घटना के बाद इलाके में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मौके पर पहुंची पुलिस, भीड़ को किया शांत
घटना की जानकारी मिलते ही नवादा थाना प्रभारी बिपिन बिहारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद परिजनों को शांत कराया और स्थिति पर नियंत्रण पाया। अस्पताल के बाहर काफी संख्या में लोग जुट गए थे, जिससे सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

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मृतका सीआईएसएफ दरोगा की पत्नी, नवजात समेत गई जान
मृतका की पहचान 27 वर्षीय खुशबू कुमारी, पत्नी राजेश कुमार (सीआईएसएफ दारोगा, वर्तमान पदस्थापना — कोलकाता एयरपोर्ट) के रूप में हुई है। मृतका मूल रूप से गजराजगंज ओपी क्षेत्र के बामपाली गांव की रहनेवाली थी। रविवार को खुशबू को प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें चंदवा मोड़ स्थित निजी अस्पताल लेकर आए थे।

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परिजनों का कहना है कि —

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“भाभी को अस्पताल में भर्ती करने के बाद कुछ ही देर में बताया गया कि बच्चा फंसा हुआ है। फिर अचानक कहा गया कि बच्चे की मौत हो गई है। इसके कुछ देर बाद भाभी की हालत बिगड़ गई और उन्हें खून की जरूरत बताई गई।”

परिजनों ने रक्तदान भी किया और लगभग ₹55,000 रुपए का भुगतान भी किया, लेकिन इसके बावजूद महिला की जान नहीं बचाई जा सकी।

डॉक्टर की गैरहाजिरी पर भड़के परिजन
मृतका के देवर पंकज कुमार ने बताया कि जब उन्होंने आईसीयू में झांका, तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था — केवल नर्सिंग स्टाफ काम कर रहे थे।उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि —

“बिना डॉक्टर के प्रसव कराया गया और इलाज में भारी लापरवाही बरती गई। अगर समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाए जाते तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी।”

अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल, जांच में जुटी पुलिस
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन पर सवालों की बौछार होने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में अक्सर बिना योग्य डॉक्टरों के इलाज किया जाता है, जिससे ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं।पुलिस ने अस्पताल संचालक और स्टाफ से पूछताछ शुरू कर दी है। नवादा थाना प्रभारी ने बताया कि—

“मामले की जांच की जा रही है। मृतका के परिजनों का बयान दर्ज किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
खुशबू कुमारी की शादी 8 दिसंबर 2020 को हुई थी। वह एक साढ़े तीन साल के बेटे नैतिक कुमार की मां थीं।परिवार पर अचानक इस दोहरी मौत ने गहरा सदमा पहुंचाया है। मृतका के मायके और ससुराल दोनों में कोहराम मचा है, परिवार के लोग रो-रोकर बेहाल हैं।

सवाल — कब सुधरेगा निजी अस्पतालों का रवैया?
यह घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों की लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करती है। प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में यदि योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं रहते, तो यह मां और शिशु दोनों की जान के लिए घातक साबित होता है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल की कार्यप्रणाली की जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

आरा की यह दर्दनाक घटना राज्य के स्वास्थ्य तंत्र पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। प्रसव जैसी सामान्य प्रक्रिया में लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी की कीमत दो मासूम जिंदगियों ने चुकाई। अब देखना यह है कि प्रशासन लापरवाह अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई करता है या नहीं, या यह मामला भी कुछ दिनों में ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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