ईरान युद्ध के बीच भारत को राहत, 92 हजार टन LPG लेकर पहुंचे दो जहाज
मुनादी लाइव : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के कारण बाधित गैस सप्लाई के बीच एलपीजी से लदे दो बड़े जहाज भारत पहुंच रहे हैं, जिससे देश में पैदा हुए गैस संकट के बीच थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
92,700 टन LPG लेकर भारत पहुंचे जहाज
जानकारी के मुताबिक ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के दो जहाज करीब 92,700 टन LPG गैस लेकर भारत पहुंच रहे हैं। इनमें से पहला जहाज ‘शिवालिक’ कच्छ के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचेगा, जबकि दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ कांडला पोर्ट पर पहुंचेगा।
बताया जा रहा है कि दोनों जहाजों को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की विशेष अनुमति दी थी, जिसके बाद ये भारत तक पहुंचने में सफल हुए।
गैस संकट के बीच मिली सीमित राहत
हालांकि इन जहाजों के पहुंचने से भारत को बहुत बड़ी राहत नहीं मिलेगी, लेकिन इससे करीब 1.25 दिन की एलपीजी खपत पूरी हो सकेगी। भारत में रोजाना लगभग 80,000 टन LPG की खपत होती है और हर दिन करीब 75 लाख सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं। देश में करीब 33 करोड़ LPG उपभोक्ता हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत सिलेंडर घरेलू रसोई में उपयोग किए जाते हैं।
होर्मुज संकट से प्रभावित हुई सप्लाई
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। भारत अपनी करीब 60 प्रतिशत LPG जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें से लगभग 85 से 90 प्रतिशत गैस खाड़ी देशों से होर्मुज के रास्ते आती है।
6 और टैंकरों को लाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक एलपीजी से लदे छह और टैंकर और एक LNG टैंकर होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में इंतजार कर रहे हैं। भारत सरकार और ईरान के बीच बातचीत चल रही है ताकि इन जहाजों को सुरक्षित रूप से भारत लाया जा सके।
बताया जा रहा है कि होर्मुज के आसपास भारत के करीब 22 जहाज भी इंतजार कर रहे हैं। अगर बातचीत सफल होती है तो आने वाले दिनों में और गैस टैंकर भारत पहुंच सकते हैं।
ईरान की नई शर्त
ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को नहीं रोकेगा। साथ ही उसने यह भी संकेत दिया है कि जो देश डॉलर की बजाय चीनी मुद्रा युआन में व्यापार करेंगे, उनके लिए होर्मुज का रास्ता खुला रहेगा।
माना जा रहा है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की गैस सप्लाई पर इसका और बड़ा असर देखने को मिल सकता है।








