रांची के चर्चित प्रेमसंस मोटर्स धोखाधड़ी मामले में बड़ी राहत, डायरेक्टर समेत चार आरोपियों को मिली अग्रिम जमानत

Premsons motors fraud case

रांची: राजधानी रांची के चर्चित प्रेमसंस मोटर्स से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में कंपनी के मालिकों और वरिष्ठ अधिकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। रांची सिविल कोर्ट ने मामले में नामजद चार आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की है। हालांकि, अदालत से अग्रिम जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप समाप्त हो गए हैं। मामले की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी।

किन आरोपियों को मिली अग्रिम जमानत?
अदालत से अग्रिम जमानत पाने वालों में प्रेमसंस मोटर्स के डायरेक्टर पुनीत पोद्दार, अवध पोद्दार, सेल्स मैनेजर शैलेश कुमार और जनरल मैनेजर लिंगराज पत्ताजोशी शामिल हैं। चारों आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के बाद अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली। इस आदेश के बाद फिलहाल इन आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है, जबकि मामले की विवेचना पूर्ववत जारी रहेगी।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता विवेक आर्य के भाई ने प्रेमसंस मोटर्स से एक कार खरीदने के लिए भुगतान किया। शिकायत के अनुसार, वाहन खरीद प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज और जानकारियां सामने आईं, जिनसे कंपनी के कार्य संचालन और लेन-देन पर सवाल उठे। इसके बाद अधिवक्ता विवेक आर्य ने पूरे मामले की जांच कराई और संबंधित पक्षों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी कथित रूप से सुनियोजित तरीके से ग्राहकों को गुमराह कर आर्थिक नुकसान पहुंचाती रही है। प्राथमिकी में दावा किया गया है कि इस कथित नेटवर्क के माध्यम से हर वर्ष लगभग 36 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी की जाती है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ग्राहकों को विभिन्न योजनाओं और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के जरिए भ्रमित कर आर्थिक अनियमितता की जाती रही है। हालांकि, इन आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच जारी है।

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चुटिया थाना में दर्ज है प्राथमिकी
इस पूरे मामले में रांची के चुटिया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि शिकायत में लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं या नहीं।

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अग्रिम जमानत का क्या मतलब?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अग्रिम जमानत मिलने का अर्थ केवल यह है कि जांच के दौरान आरोपी को तत्काल गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। यह आदेश आरोपियों को जांच में सहयोग करने की शर्त पर राहत देता है। इससे उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी या आरोप स्वतः समाप्त नहीं हो जाते। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। वहीं, यदि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो जांच रिपोर्ट उसी आधार पर तैयार की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
अब पुलिस मामले की विस्तृत जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल अदालत के आदेश से आरोपियों को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन मामले की कानूनी जांच और सुनवाई जारी रहेगी।

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