Durga Puja
tulsyan

रिम्स में मरीज की मौत के बाद हंगामा, परिजनों और जूनियर डॉक्टरों में मारपीट; PG डॉक्टरों ने इलाज से किया इनकार

Assault on doctors at RIMS

सर्जरी वार्ड C-2 में मरीज की मौत के बाद विवाद, डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

रांची: राजधानी के रिम्स (RIMS) में मरीज की मौत के बाद मृतक के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद रिम्स के PG डॉक्टरों ने वर्तमान स्थिति में मरीज देखने से इनकार कर दिया है। जूनियर डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण अस्पताल की व्यवस्था पर भी असर पड़ा है और बाहर से एंबुलेंस के जरिए इलाज के लिए पहुंचे गंभीर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना रिम्स के सर्जरी वार्ड C-2 की बताई जा रही है, जहां इलाजरत एक मरीज की मौत के बाद विवाद शुरू हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत पहले से गंभीर थी और इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।

डॉक्टरों की सुरक्षा पर जूनियर डॉक्टरों ने उठाए सवाल
रिम्स जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि डॉक्टरों के साथ आए दिन मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चिकित्सक खुद सुरक्षित नहीं होंगे तो वे मरीजों का इलाज किस तरह कर पाएंगे। डॉ. जितेंद्र कुमार के मुताबिक, इसी वजह से जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल मरीज देखने से इनकार किया है। हालांकि, रिम्स में मरीजों का इलाज पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उनके अनुसार, सीनियर और रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

‘मरीज की हालत पहले से थी क्रिटिकल’
डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिस मरीज की इलाज के दौरान मौत हुई, उसकी स्थिति पहले से ही गंभीर थी। उनका दावा है कि मरीज के इलाज में किसी तरह की कमी या लापरवाही नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद बड़ी संख्या में मृतक के परिजन और उनके साथ आए लोगों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की। डॉक्टरों का कहना है कि घटना के दौरान रिम्स प्रबंधन की ओर से तैनात सुरक्षाकर्मियों ने डॉक्टरों को बचाने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया। डॉ. जितेंद्र ने कहा कि यदि अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों को ही सुरक्षा नहीं मिलेगी तो उनके लिए इस माहौल में काम करना मुश्किल होगा।

shrawani mela

पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित था मरीज
रिम्स सर्जरी विभाग के सह विभागाध्यक्ष डॉ. निशीथ ने बताया कि मृतक मरीज पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित था। उन्होंने भी इलाज में किसी तरह की कमी से इनकार किया। डॉ. निशीथ ने कहा कि मरीज गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। इसके बावजूद डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना में शामिल लोग पास की बस्ती से आए थे और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

happy Teacher Day

मारपीट में परिजन भी घायल, पुलिस ने कराया इलाज
घटना के दौरान मृतक के एक परिजन के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि बरियातू पुलिस ने उन्हें बचाया और इलाज के लिए रिम्स के इमरजेंसी विभाग में ले जाया गया। इस घटना में डॉक्टरों और मृतक के परिजनों के बीच मारपीट की स्थिति बनी। पुलिस की मौजूदगी के बाद स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया।

resizone-elanza
rlifecare

जूनियर डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का असर
जूनियर डॉक्टरों के मरीज देखने से इनकार करने का असर रिम्स की स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। बाहर से एंबुलेंस के जरिए गंभीर मरीज इलाज के लिए रिम्स पहुंचे, लेकिन उन्हें तत्काल उपचार मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ गंभीर मरीज एंबुलेंस में ही जीवन और मौत से संघर्ष करते नजर आए। इससे अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर उठा सवाल
रिम्स में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच विवाद और मारपीट की घटनाएं पहले भी चिंता का विषय रही हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों का इलाज करना चाहते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त होना भी जरूरी है। फिलहाल सीनियर और रेजिडेंट डॉक्टरों के भरोसे इलाज व्यवस्था चलने की बात कही गई है। वहीं, मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलना सबसे अहम है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन के सामने डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ मरीजों की निर्बाध चिकित्सा व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *