JPSC-JSSC छात्र आंदोलन: सरकार-छात्र वार्ता शुरू , आज की बैठक पर टिकी पूरे झारखंड की नजर
मंत्रियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक
आंदोलन के भविष्य पर पड़ सकता है बड़ा असर

रांची: जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे गतिरोध के बाद अब राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच वार्ता का रास्ता साफ हो गया है। कुछ ही देर में सरकार के प्रतिनिधियों और छात्र डेलिगेशन के बीच अहम बैठक शुरू होने वाली है। इस वार्ता पर न सिर्फ आंदोलनकारी छात्रों, बल्कि पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है।
सरकार की ओर से पांच सदस्यीय टीम शामिल
सरकार की ओर से वार्ता के लिए गठित उच्चस्तरीय टीम में उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका सिंह पांडेय, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, समाज कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह शामिल होंगे। सरकार का प्रयास है कि बातचीत के जरिए लंबे समय से चल रहे आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए।

छात्रों ने सौंपा 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने भी सरकार से वार्ता के लिए अपना अंतिम प्रतिनिधिमंडल घोषित कर दिया है। छात्रों की ओर से रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे। यही प्रतिनिधि आंदोलन से जुड़ी मांगों और छात्रों की चिंताओं को सरकार के समक्ष विस्तार से रखेंगे।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से—
- JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
- परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- भविष्य की परीक्षाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है।

कई दिनों की बातचीत के बाद बनी सहमति
सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच पिछले कुछ दिनों से लगातार संवाद की प्रक्रिया चल रही थी। पहले सरकार ने छात्रों से सीमित प्रतिनिधिमंडल भेजने का आग्रह किया था। शुरुआती दौर में प्रतिनिधिमंडल को लेकर मतभेद भी सामने आए थे, लेकिन बाद में छात्रों ने सरकार की शर्तों के अनुरूप अपना संशोधित डेलिगेशन तैयार कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता का रास्ता खुल गया।

बैठक के नतीजे पर टिकी आंदोलन की दिशा
छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे बैठक में अपनी सभी मांगों को मजबूती से सरकार के सामने रखेंगे। उनका कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और लिखित पहल की अपेक्षा है। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है और सरकार की ओर से ठोस निर्णय या स्पष्ट रोडमैप सामने आता है, तो आंदोलन की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि छात्रों को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो आंदोलन पहले की तरह जारी रहने की संभावना है।

राज्यभर की नजर इस बैठक पर
पिछले कई दिनों से चल रहा JPSC-JSSC छात्र आंदोलन झारखंड का सबसे बड़ा युवा आंदोलन बन चुका है। अब सरकार और छात्रों के बीच होने वाली यह पहली औपचारिक वार्ता आंदोलन के भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है। राज्य के लाखों प्रतियोगी अभ्यर्थियों की निगाहें इस बैठक के परिणाम पर टिकी हैं।






