श्री कृष्ण विद्या मंदिर में वन महोत्सव का भव्य आयोजन, छात्रों ने लिया वृक्षारोपण और पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प

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रामगढ़ : श्री कृष्ण विद्या मंदिर के प्रांगण में आज दिनांक 5 जुलाई 2025, शनिवार को वन महोत्सव का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और पर्यावरणीय चेतना के साथ किया गया। यह अवसर विद्यालय के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

छात्रों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में विद्यालय के कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और परिसर में पौधारोपण कर वन महोत्सव को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उन्हें सुरक्षित रखने की शपथ ली। वहीं, कक्षा नर्सरी से पांचवीं तक के छात्र-छात्राओं को उनके शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा पौधों से मिलने वाले लाभों और उनके महत्व की जानकारी दी गई। बच्चों ने बड़े ध्यान से सुना और पेड़-पौधों के साथ जुड़ाव महसूस किया।

वृक्षारोपण के साथ ज्ञानवर्धक गतिविधियां भी
इस कार्यक्रम में चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्रों ने पारिस्थितिकी तंत्र, हरी पृथ्वी, और पर्यावरण सुरक्षा पर आधारित आकर्षक चित्र प्रस्तुत किए। इन चित्रों के माध्यम से छात्रों ने पृथ्वी को हरा-भरा और स्वच्छ रखने का संदेश दिया।

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शिक्षकों ने दी प्रेरक जानकारियाँ
कार्यक्रम के मंच का संचालन विज्ञान शिक्षिका रंजू कुमारी ने किया, जिन्होंने वनों के महत्व, पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका, और वर्तमान समय में जंगलों के हो रहे विनाश पर प्रभावशाली रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

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“वन है तो जीवन है — यह कोई नारा नहीं, बल्कि हमारी अस्तित्व की सच्चाई है।”

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विद्यालय के प्राचार्य एम. कृष्णा चन्द्रा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वनों की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे हर साल एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल करें।

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शारीरिक शिक्षा शिक्षक मनोरंजन चौधरी ने भी पौधों से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ, प्राकृतिक संतुलन, और वातावरण की शुद्धता पर उपयोगी जानकारी दी।

“वन है तो जीवन है” के साथ लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी छात्रों ने “वन है तो जीवन है” के नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर पूरे विद्यालय परिसर में हरियाली की लहर दिखाई दी। बच्चों ने पौधों को अपना “हरा दोस्त” मानते हुए उन्हें संरक्षित रखने की जिम्मेदारी स्वयं ली।

वन महोत्सव क्यों है जरूरी?
वन महोत्सव हर साल जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जनता को पेड़-पौधों के प्रति संवेदनशील बनाना, वनों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना, और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना उत्पन्न होती है।

कार्यक्रम की सफलता का श्रेय विद्यालय के शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और प्रशासनिक टीम को जाता है, जिनकी देखरेख में यह पूरा आयोजन अनुशासित और सार्थक रूप से संपन्न हुआ। विद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागी छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने की भी घोषणा की है।

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श्री कृष्ण विद्या मंदिर द्वारा आयोजित यह वन महोत्सव न केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से उपयोगी रहा, बल्कि यह छात्रों में प्राकृतिक चेतना और उत्तरदायित्व की भावना को भी विकसित करने में सहायक रहा। आज के छात्र ही कल के पर्यावरण रक्षक बनेंगे — यह कार्यक्रम इसी सोच का प्रतिबिंब था।

रामगढ़ से मुकेश सिंह की रिपोर्ट…..

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