भूख से तड़पती मां को घर में बंद कर गए महाकुंभ : मां की हालत गंभीर, शरीर पर जख्म और बदबू

रामगढ़ जिले के सुभाष नगर, अरगड्डा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक वृद्ध महिला अपनी ही संतान की लापरवाही का शिकार हो गई। बेटा-बहू महाकुंभ स्नान के लिए प्रयागराज चले गए और अपनी वृद्ध मां को घर में बंद कर दिया। चार दिनों तक भूख, बदहवासी और अस्वस्थता से जूझती मां दरवाजे तक घिसटते हुए पहुंची, तब जाकर पड़ोसियों को इस घटना की भनक लगी।

घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोस में रहने वाले इबरार ने सुबह घर के बाहर टहलते वक्त दरवाजे पर ठक-ठक की आवाज सुनी। जब उन्होंने झांककर देखा तो अंदर वृद्ध महिला संजू देवी तड़पती नजर आईं। उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों और महिला के परिजनों को सूचना दी।
सूचना मिलते ही वृद्ध महिला की बेटी चांदनी, भाई मनसा महतो और भतीजा मिथुन प्रजापति मौके पर पहुंचे। स्थानीय वार्ड 13 के प्रतिनिधि सह समाजसेवी रंजीत पासवान को भी घटना की जानकारी दी गई। रामगढ़ पुलिस को सूचना देने के बाद घर का ताला तोड़ा गया और वृद्धा को बाहर निकाला गया।

महिला के भाई मनसा महतो ने बताया कि उन्होंने अपने भांजे अखिलेश और बहू सोनी से संपर्क किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। वहीं, बेटी चांदनी ने रोते हुए बताया कि भाई ने महाकुंभ जाने से पहले उन्हें मां की देखभाल की कोई जानकारी नहीं दी थी, जबकि मां बोलने और चलने में असमर्थ व गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं।
वही वृद्ध महिला के भतीजे मिथुन प्रजापति ने रोष जताते हुए कहा कि हमारी मौसी को इस तरह से घर में बंद कर छोड़ना अमानवीय है।


वृद्ध महिला के शरीर पर घावों से पस निकल रहा था और बदबू आ रही थी। घटना सामने आने के बाद इलाके के लोग भारी संख्या में मौके पर जुट गए और बेटा-बहू के इस अमानवीय व्यवहार की निंदा करने लगे।
अब सवाल उठता है कि क्या संतान अपने माता-पिता को इस कदर बेसहारा छोड़ सकती है? प्रशासन और समाज को ऐसे मामलों पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि बुजुर्गों के साथ इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।