जन्मदिन विशेष: संघर्ष, सेवा और संकल्प की कहानी

अमित
नेमरा गांव की सुबह… मिट्टी की सोंधी खुशबू और खेतों में काम करते लोग। इन्हीं गलियों में कभी एक नन्हा बच्चा दौड़ता था, जिसके कदम गांव की पगडंडियों पर तो थे, लेकिन सपने दूर-दूर तक फैलते आसमान को छू रहे थे। वही बच्चा आज झारखंड का मुख्यमंत्री है — हेमंत सोरेन।

10 अगस्त 1975 को जन्मे हेमंत, झारखंड आंदोलन के योद्धा दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हैं। बचपन से ही उन्होंने देखा कि सत्ता और संघर्ष का रिश्ता कितना कठिन होता है। गांव की साधारण ज़िंदगी से लेकर राजनीति के गलियारों तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन हेमंत ने हर मोड़ पर धैर्य और संकल्प का सहारा लिया।

गांव से राजनीति तक का सफर
10 अगस्त 1975 को जन्मे हेमंत सोरेन, झारखंड आंदोलन के नायक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पुत्र हैं। बचपन से ही उन्होंने देखा कि जनता के हक के लिए लड़ाई आसान नहीं होती। BIT मेसरा में इंजीनियरिंग पढ़ाई बीच में छोड़कर उन्होंने राजनीति को अपना जीवन समर्पित कर दिया।
2009 में बड़े भाई दुर्गा सोरेन के निधन और पिता शिबू सोरेन की बढ़ती उम्र के साथ हेमंत सोरेन पर झामुमो की पूरी जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने इसे पूरी निष्ठा और दृढ़ता से निभाया। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने राज्य में कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं और झारखंड की जनता के मुद्दों पर मुखर होकर काम किया। आज जब वे 50 वर्ष के हो गए हैं, उनका जन्मदिन ऐसे समय आया है जब वे अपने पिता के निधन के शोक में हैं। एक पुत्र के रूप में वे अपने पिता की राजनीतिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और राज्य की सेवा में निरंतर लगे हुए हैं।


जनता के बीच पहचान
2005 में उन्होंने दुमका से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और संगठनात्मक मजबूती के साथ कार्य करते रहे। 2009 में दुमका सीट से जीत दर्ज की और 2010 में राज्य के उप मुख्यमंत्री बने। 13 जुलाई 2013 को उन्होंने पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह सरकार झामुमो, कांग्रेस और राजद के समर्थन से बनी थी और उनका कार्यकाल 23 दिसंबर 2014 तक चला। 2014 में वे दुमका और बरहेट दोनों सीटों से चुनाव लड़े दुमका में हार मिले, लेकिन बरहेट से विजयी हुए। इसके बाद वे विपक्ष के नेता के रूप में पांच वर्षों तक सक्रिय राजनीति में डटे रहे।


मुख्यमंत्री के तौर पर जनसेवा का मिशन
2013 में पहली बार मुख्यमंत्री, फिर 2019 में ऐतिहासिक जीत के साथ दोबारा मुख्यमंत्री के तौर पे सत्ता में आए। इस बार उनका फोकस था — गांव-गांव तक सड़क, पानी, बिजली, स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार नीति, आदिवासी पहचान और संस्कृति की रक्षा और सबसे अहम — जनसंवेदनशील योजनाएं, जो सीधे गरीबों के जीवन में बदलाव लाएं।


झारखंड के असली चेहरे तक विकास
“आपकी योजना, आपकी सरकार आपके द्वार” जैसी पहल ने सरकारी दफ्तरों को गांव की चौपाल तक पहुंचा दिया। जहां कभी फरियादी महीनों चक्कर लगाते थे, अब योजनाएं सीधे उनके घर तक पहुंचती हैं।
जेल यात्रा: संघर्ष का नया अध्याय
2024 में कानूनी विवादों और विपक्षी हमलों के बीच हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा। कई लोगों ने इसे उनके राजनीतिक करियर का कठिन मोड़ माना, लेकिन हेमंत ने जेल से भी जनता को संदेश भेजा — “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”
इस दौरान उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे राजनीतिक मोर्चे को संभाला। उन्होंने जनसभाओं में खुलकर कहा — “हेमंत जी ने हमेशा झारखंड की जनता के लिए काम किया है, और हम इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे।”
कल्पना सोरेन का यह दृढ़ समर्थन न सिर्फ परिवारिक मजबूती का प्रतीक था, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नई महिला शक्ति के उदय का संकेत भी।

आदिवासी नेता के रूप में मजबूती
हेमंत सोरेन सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान के सबसे सशक्त चेहरों में से एक हैं। उन्होंने सरना धर्म कोड, CNT-SPT एक्ट की रक्षा, पारंपरिक आजीविका के संरक्षण और आदिवासी भाषा-संस्कृति के संवर्धन के लिए लगातार काम किया। उनके लिए राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता की ढाल है।
जनता के बीच लोकप्रियता का राज़
चाहे जेल में हों या मुख्यमंत्री की कुर्सी पर, हेमंत सोरेन की जनता से दूरी कभी नहीं हुई। वे संकट के समय सीधे लोगों के बीच पहुंचते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान का आश्वासन वहीं देते हैं। इसी वजह से लोग उन्हें ‘मुख्यमंत्री’ से ज्यादा ‘हेमंत भैया’ कहकर पुकारते हैं।

जन्मदिन पर जनता का संदेश
आज, उनके जन्मदिन पर गांव से लेकर शहर तक, और सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़ है। #जननेताहेमंतसोरेन और #HappyBirthdayHemantSoren ट्रेंड कर रहे हैं। माइयां योजना से लाभान्वित महिलाएं, आदिवासी युवा, किसान और मजदूर — सभी अपने-अपने अंदाज में उन्हें बधाई दे रहे हैं।
आगे का सफर
हेमंत सोरेन का विज़न है — हर युवा को रोजगार, हर गांव तक पक्की सड़क और बिजली, आदिवासी संस्कृति की वैश्विक पहचान, और ऐसा झारखंड, जहां विकास का लाभ सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।
हेमंत सोरेन की कहानी गांव की पगडंडी से मुख्यमंत्री पद तक, फिर जेल की सलाखों से जनता के बीच वापसी तक का सफर है। उनकी ताकत जनता का भरोसा, पत्नी कल्पना सोरेन का अटूट समर्थन और आदिवासी अस्मिता के लिए उनकी निष्ठा है।
मैया योजना जैसी पहलें बताती हैं कि उनके लिए विकास सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर मुस्कान में है।
जन्मदिन के इस मौके पर, मुनादी लाइव की पूरी टीम की ओर से उन्हें शुभकामनाएं — कि उनका संघर्ष, सेवा और संकल्प झारखंड की नई दिशा तय करता रहे।