अब नहीं लगेगा मिनिमम बैलेंस न रखने पर जुर्माना! भारत के 6 बैंकों ने बदले नियम, जानिए आपके बैंक का नाम इसमें है या नहीं?

मुनादी डेस्क : देशभर के बैंक ग्राहकों को अब एक बड़ी राहत मिली है। भारत के 6 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपने सेविंग अकाउंट धारकों के लिए न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की शर्त (Average Monthly Balance – AMB) को हटा दिया है। यानी अब यदि आपके सेविंग अकाउंट में न्यूनतम राशि नहीं भी रहती है, तो भी कोई पेनाल्टी या जुर्माना नहीं लगेगा।

यह फैसला विशेष रूप से कम आय वर्ग, किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। इससे अब बैंकिंग और अधिक सुलभ, समावेशी और बोझरहित हो जाएगी।
क्या होता है AMB (Average Monthly Balance)?
एएमबी यानी औसत मासिक शेष राशि वह न्यूनतम रकम होती है जो बैंक खाताधारकों को हर महीने अपने खाते में बनाए रखनी होती है। यदि अकाउंट में यह औसत राशि नहीं रहती, तो बैंक ग्राहकों से पेनाल्टी वसूलते हैं। ये पेनाल्टी 100 से 500 रुपये तक हो सकती है। अब इन छह बैंकों ने इस प्रथा को समाप्त कर ग्राहकों को राहत दी है।
जानिए कौन-कौन से बैंक शामिल हैं इस बदलाव में?
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI) : भारत का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई पहले ही 2020 में यह प्रथा समाप्त कर चुका है। उन्होंने सभी सामान्य सेविंग अकाउंट्स से न्यूनतम शेष राशि की अनिवार्यता हटाई थी। इससे लाखों ग्राहकों को लाभ हुआ।


ध्यान दें: एसबीआई की ये छूट बेसिक सेविंग अकाउंट्स और जनधन खातों पर पहले से लागू थी, लेकिन अब यह सामान्य खातों पर भी प्रभावी है।
- बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) : बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1 जुलाई 2025 से अपने सभी स्टैंडर्ड सेविंग अकाउंट्स पर न्यूनतम शेष राशि न रखने पर लगने वाली फीस को समाप्त कर दिया है। हालांकि प्रीमियम खातों (BoB Advantage, BoB Privilege आदि) पर यह नियम लागू नहीं होगा।
- केनरा बैंक (Canara Bank) : मई 2025 में केनरा बैंक ने सभी प्रकार के बचत खातों – सामान्य सेविंग अकाउंट, वेतन खाता, एनआरआई खाता – से AMB की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया। इससे उनके लाखों ग्रामीण और शहरी ग्राहक लाभान्वित होंगे।
- इंडियन बैंक (Indian Bank) : इंडियन बैंक ने अपने जन्मदिन यानी 7 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सभी सेविंग अकाउंट्स पर न्यूनतम शेष राशि की शर्त हटाई है। यह फैसला वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB) : 1 जुलाई 2025 से पीएनबी ने न्यूनतम शेष राशि न रखने पर कोई पेनाल्टी न लगाने का ऐलान किया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा विशेष रूप से महिलाओं, किसानों, विद्यार्थियों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
- बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) : बैंक ऑफ इंडिया ने भी घोषणा की है कि वे अब अपने बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस न रखने पर कोई दंड नहीं लगाएंगे। बैंक ने कहा कि इसका उद्देश्य ग्राहकों को लचीलापन और सशक्तिकरण प्रदान करना है।

इस फैसले का व्यापक असर क्या होगा?
- ग्रामीण और गरीब तबकों की बैंकिंग तक आसान पहुंच
- महिला खाताधारकों और बुजुर्गों को बिना डर के अकाउंट संचालन की सुविधा
- स्टूडेंट्स और युवाओं को बिना शुल्क के सेविंग की आदत
- बैंकिंग सेक्टर में विश्वास और उपयोगिता में वृद्धि
- वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग को मिलेगा बढ़ावा


Munadi Live की राय:
इन बदलावों से यह साफ है कि भारत के सार्वजनिक बैंक अब ग्राहक केंद्रित रणनीति की ओर बढ़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों, जनधन खाताधारकों और डिजिटल बैंकिंग यूज़र्स के लिए यह पहल क्रांतिकारी साबित हो सकती है।
क्या करें ग्राहक?
अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में है, तो अपनी ब्रांच या बैंक की वेबसाइट से पुष्टि कर लें कि आपका खाता इस छूट में शामिल है या नहीं। पुराने शुल्क कटने की स्थिति में बैंक से रिक्वेस्ट करके स्थिति स्पष्ट करें। बिना पेनाल्टी की चिंता के अब आप आसानी से अपना बैंक खाता चला सकते हैं।