राजीव गांधी जयंती: आधुनिक भारत के सपनों के शिल्पकार को श्रद्धांजलि

आधुनिक भारत के निर्माता की स्मृति
मुनादी विशेष: 20 अगस्त, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए यादगार दिन है। 1984 में इंदिरा गांधी की दुखद हत्या के बाद राजनीति में आए राजीव गांधी उस दौर में देश के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे। महज़ 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने वे आज भी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास में दर्ज हैं। उनके नेतृत्व का अंदाज़ पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग था। राजीव गांधी तकनीक, आधुनिक सोच और युवा दृष्टिकोण के जरिए भारत को बदलना चाहते थे। उन्होंने भारतीय राजनीति में यह संदेश दिया कि देश की असली ताकत उसके युवा और ग्रामीण भारत हैं।


तकनीकी क्रांति के जनक
राजीव गांधी को अक्सर भारत की सूचना प्रौद्योगिकी और टेलीकॉम क्रांति का जनक कहा जाता है। उन्होंने कंप्यूटर और इंटरनेट की शक्ति को उस दौर में पहचान लिया था जब दुनिया के बड़े देश भी इसे अपनाने की शुरुआत कर रहे थे।

उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर का उदारीकरण किया और कंप्यूटर शिक्षा को स्कूल-कॉलेज स्तर पर बढ़ावा दिया। उनका विश्वास था कि आने वाले समय में भारत की ताकत सिर्फ खेती या उद्योग में नहीं बल्कि तकनीक और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में होगी।
आज भारत की जो पहचान “आईटी हब” और “डिजिटल इंडिया” के रूप में है, उसकी बुनियाद राजीव गांधी ने ही रखी थी। नंदन नीलेकणी जैसे आईटी नेताओं ने भी माना है कि राजीव गांधी की सोच ने भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने का मार्ग दिखाया।

शिक्षा सुधार और युवाओं के लिए नई दिशा
राजीव गांधी का जोर हमेशा शिक्षा और युवाओं पर रहा। उन्होंने नई शिक्षा नीति की शुरुआत की, जिसमें आधुनिक विषयों, विज्ञान और तकनीक को ज्यादा महत्व दिया गया। उन्होंने देशभर में नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS) का गठन किया ताकि युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जा सके।
उनका मानना था कि भारत तभी आगे बढ़ सकता है जब उसके युवा शिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मविश्वासी बनें। यही कारण था कि उन्होंने कंप्यूटर शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और तकनीकी संस्थानों के विस्तार पर बल दिया।


पंचायती राज: लोकतंत्र की असली जड़ें
राजीव गांधी का सबसे बड़ा योगदान था 73वां और 74वां संविधान संशोधन, जिसके जरिए पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा मिला। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि गांवों, पंचायतों और नगर निकायों को सीधे प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार मिले।

उनका नारा था – “लोकतंत्र का मतलब सिर्फ दिल्ली और राज्य की राजधानी तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचना चाहिए।”
आज देशभर में पंचायत चुनाव और स्थानीय निकाय की मजबूती उन्हीं की दूरदृष्टि का परिणाम है।



शांति, सौहार्द्र और वैश्विक दृष्टिकोण
राजीव गांधी सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नेता नहीं थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को एक आधुनिक और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।
उन्होंने श्रीलंका में शांति बनाए रखने के लिए इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) भेजी, हालांकि यह कदम विवादास्पद भी रहा। लेकिन उनकी मंशा हमेशा शांति और स्थिरता की थी। उन्होंने एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने, विज्ञान और तकनीक में सहयोग बढ़ाने और परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की वकालत की।

आधुनिकता और परंपरा का संतुलन
राजीव गांधी की खासियत यह थी कि वे आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बना पाए। वे एक तरफ तकनीक और सूचना क्रांति की बात करते थे, तो दूसरी तरफ ग्रामीण भारत और किसानों की समस्याओं को भी समझते थे। उन्होंने किसानों के लिए सहकारी समितियों और ग्रामीण विकास योजनाओं पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि

झारखंड में श्रद्धांजलि का दौर
राजीव गांधी की जयंती पर झारखंड में भी भावनात्मक माहौल देखा गया। रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो और हजारीबाग में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राजेश ठाकुर (पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष) ने कहा –
“राजीव गांधी ने भारत को तकनीकी क्रांति का रास्ता दिखाया। पंचायती राज व्यवस्था के जरिए उन्होंने लोकतंत्र को गांवों तक पहुंचाया। उनकी सोच ही आज भारत को डिजिटल इंडिया बनाने का आधार बनी।”

वहीं भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा –
“राजीव गांधी का योगदान सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है। उन्होंने जो पंचायती राज व्यवस्था दी, उसका लाभ आज हर नागरिक को मिल रहा है।”
युवाओं के लिए प्रेरणा
राजीव गांधी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे मानते थे कि भारत का भविष्य गांवों और युवाओं के हाथ में है। उनका यह कथन आज भी प्रासंगिक है –
“भारत की ताकत उसके गांवों और उसके युवा हैं। अगर इन दोनों को सशक्त बना दिया जाए तो भारत को कोई रोक नहीं सकता।” राजीव गांधी को याद करना सिर्फ एक राजनेता को याद करना नहीं है, बल्कि उस सपने को याद करना है जिसमें भारत एक आधुनिक, तकनीकी रूप से मजबूत और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में उभरता है।
आज उनकी जयंती पर पूरा देश और झारखंड उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार, तकनीकी क्रांति का जनक और लोकतंत्र को गहराई तक ले जाने वाले नेता के रूप में नमन कर रहा है। उनकी सोच और दूरदृष्टि आज भी भारत के लिए प्रेरणा है।
