झामुमो महासचिवों ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देते हुए कहा – “झारखंड की आत्मा आज शोकाकुल है”

महासचिव विनोद कुमार पांडेय और सुप्रियो भट्टाचार्य ने गहरी संवेदना प्रकट की महासचिव विनोद कुमार पांडेय और सुप्रियो भट्टाचार्य ने गहरी संवेदना प्रकट की

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक संरक्षक, आदिवासी चेतना के महानायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड शोक में डूबा है। पार्टी के दो प्रमुख महासचिवों — विनोद कुमार पांडेय और सुप्रियो भट्टाचार्य ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें युगपुरुष बताया और कहा कि यह केवल एक नेता की नहीं, बल्कि हमारे संघर्ष की आत्मा की विदाई है।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा:

“दिशोम गुरु, हमारे लिए केवल नेता नहीं थे, वे पथप्रदर्शक, विचार पुरुष और हमारे संघर्ष की जीवित आत्मा थे। उन्होंने हमें सिखाया कि राजनीति सेवा का माध्यम है और अंतिम व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा सबसे बड़ा धर्म है। उनकी सादगी, सिद्धांतवाद और संघर्ष की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनके अधूरे सपनों को पूरा करना ही अब झामुमो का संकल्प है।”

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सुप्रियो भट्टाचार्य ने अपने वक्तव्य में कहा:

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“गुरुजी का निधन हिमालय के स्खलन जैसा है। उन्होंने सदैव अज्ञानता के खिलाफ शिक्षा, शोषण के खिलाफ लड़ाई, और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष का रास्ता दिखाया। वे कभी हार नहीं माने।गुरुजी भले ही शारीरिक रूप से हमारे साथ न हों, लेकिन उनकी विचारधारा और शिक्षाएं पार्टी के प्रत्येक सदस्य को भविष्य में भी प्रेरित करती रहेंगी।”

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पार्टी का संदेश
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दिशोम गुरु को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए यह स्पष्ट किया है कि उनका योगदान केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि झारखंड आंदोलन की आत्मा है। पार्टी ने उन्हें अमर नायक और जनता की आवाज बताया।

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सार्वजनिक शोक में डूबा प्रदेश
रांची समेत पूरे राज्य में झामुमो कार्यालयों पर शोक सभाएं आयोजित की गईं। कार्यकर्ताओं ने “गुरुजी अमर रहें” के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर देशभर से श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन अब इस धरा पर नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और आदिवासी गौरव के प्रति उनका समर्पण सदा जीवित रहेगा। झारखंड का हर कार्यकर्ता अब उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ेगा।

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