गुमला: ACB की बड़ी कार्रवाई, 20 हजार रिश्वत लेते लेखापाल गिरफ्तारभ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख, शिकायत पर हुई एसीबी की सफल ट्रैप कार्रवाई

रांची/गुमला : झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की मुहिम लगातार जारी है। इसी कड़ी में गुरुवार को गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड में एक बड़ी कार्रवाई की गई, जहां ACB की टीम ने प्रखंड कार्यालय में कार्यरत लेखापाल राजकुमार साहनी को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए रांची लाया गया है।

शिकायत के बाद बिछा जाल
मामले की शुरुआत चैनपुर प्रखंड के सेवानिवृत्त कर्मचारी धनंजय प्रसाद की शिकायत से हुई। उन्होंने ACB को लिखित रूप से सूचित किया था कि लेखापाल राजकुमार साहनी ने उनकी भविष्य निधि (PF) की राशि निकालने के एवज में 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद ACB की टीम ने मामले की गुप्त जांच की। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जैसे ही धनंजय प्रसाद ने आरोपी को तय रकम दी, टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे रंगेहाथों पकड़ लिया।
आरोपी को रांची लाया गया
गिरफ्तारी के बाद ACB की टीम आरोपी लेखापाल को गुमला से रांची लेकर आई। यहां उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में केवल लेखापाल ही नहीं, बल्कि अगर किसी और कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
गुमला की यह कार्रवाई एक बार फिर यह साबित करती है कि झारखंड सरकार और एसीबी भ्रष्टाचार को लेकर “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रहे हैं। आमतौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारी और आम जनता अपने वैध अधिकारों के लिए महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं। लेकिन एसीबी की सक्रियता ने यह संदेश दिया है कि अब रिश्वतखोरों की खैर नहीं है।


हाल के महीनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां
यह कोई पहला मामला नहीं है। झारखंड में ACB ने पिछले कुछ महीनों में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है।
कुछ महीने पहले हजारीबाग में कृषि विभाग के अधिकारी को रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा गया था। वहीं, पलामू और बोकारो में भी एसीबी ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी, जिसमें कई लेखापाल और अफसर गिरफ्तार किए गए।
सबसे चर्चित मामला रांची में दर्ज हुआ था, जहां एक इंजीनियर को ठेकेदार से घूस लेते रंगेहाथों पकड़ा गया। इन सभी मामलों ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे छोटे स्तर का हो या बड़े स्तर का, एसीबी किसी को भी बख्शने वाली नहीं है।

जनता के लिए बड़ा संदेश
इस कार्रवाई से सबसे बड़ा संदेश आम जनता को मिला है। अब लोग बेखौफ होकर रिश्वतखोर अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एसीबी की टीम हर शिकायत की गंभीरता से जांच करती है और दोषियों को पकड़ने के लिए तुरंत कार्रवाई करती है।


राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
गुमला की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि सरकारी दफ्तरों में काम कराने के लिए घूस देना मजबूरी बन गया था, लेकिन एसीबी की सक्रियता से हालात में बदलाव आ सकता है। राजनीतिक दलों की ओर से भी भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयों को सराहा गया है।
गुमला में लेखापाल राजकुमार साहनी की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है, जहां आम जनता और रिटायर कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए घूस देने पर मजबूर हो जाते हैं। ACB की यह कार्रवाई झारखंड की कानून-व्यवस्था और सुशासन की दिशा में एक मजबूत कदम है।