मांडू विधानसभा क्षेत्र में कोल माफियाओं का राज, धड़ल्ले से जारी अवैध कोयले का कारोबार

रामगढ़ कोयला तस्करी

रामगढ से मुकेश सिंह की रिपोर्ट : रामगढ़ जिले के मांडू विधानसभा क्षेत्र में अवैध कोयला तस्करी अपने चरम पर है। कोयला माफिया मांडू, कुजू, वेस्ट बोकारो ओपी क्षेत्र समेत खपिया, लूरूंगा और लठिया में अवैध खनन और तस्करी का खेल बेखौफ होकर चला रहे हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद यह कारोबार दिन-रात फल-फूल रहा है।

प्रशासन की सख्ती के बावजूद जारी है कोयला तस्करी

रामगढ़ उपायुक्त द्वारा अवैध खनन और कोयला तस्करी पर लगाम लगाने के लिए खनन टास्क फोर्स की बैठकें की जाती रही हैं। बावजूद इसके, मांडू सर्कल, वेस्ट बोकारो ओपी और कुजू ओपी क्षेत्र में कोयले का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है।

whatsapp channel

Jever News Paper

सूत्रों की मानें तो बड़े पैमाने पर मोटरसाइकिलों और ट्रकों के जरिए कोयले की तस्करी हो रही है। कुजू और मांडू क्षेत्र से दर्जनों ट्रक कोयला बिहार के डेहरी और बनारस की मंडियों में भेजा जा रहा है।

the-habitat-ad

खनन से हो रही मौतें, फिर भी जारी है अवैध कारोबार

resizone elanza

लूरूंगा और लठिया क्षेत्र में पहले भी अवैध खनन के कारण खदान धंसने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। उस समय इस कारोबार में कुजू निवासी डब्बू सिंह का नाम सामने आया था। अब भी डब्बू सिंह और मोहम्मद इनाम का नाम चर्चाओं में है, जो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

कोयले का खेल: स्पंज फैक्ट्रियों तक सप्लाई

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुजू, मांडू और वेस्ट बोकारो क्षेत्र से प्रतिदिन दर्जनों ट्रकों में अवैध कोयला लादकर आलोक स्पंज फैक्ट्री और श्री राम स्पंज फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है, जो जांच का विषय है।

वन क्षेत्रों में भी धड़ल्ले से खनन

वहीं अवैध कोयला खनन अब वन क्षेत्र तक भी फैल चुका है। गिद्दी जंगली क्षेत्र, कुरा, खपिया, लूरूंगा और लठिया जंगलों से कोयले का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है।

वन विभाग की मजबूरी: मैनपावर और आर्म्स की कमी

इस गंभीर मामले पर जब रामगढ़ के वन प्रमंडल पदाधिकारी नितेश कुमार से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि वन विभाग के पास मैनपावर और आर्म्स की कमी है। फिर भी अवैध खनन और तस्करी रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती

गौरतलब है कि अवैध कोयला तस्करी पर रोक लगाने की तमाम कोशिशें अब तक विफल साबित हो रही हैं। कोल माफिया बेधड़क कारोबार चला रहे हैं, जबकि प्रशासन जांच और बैठकों तक ही सीमित दिख रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या सरकार और प्रशासन इस अवैध कारोबार पर नकेल कसने में कामयाब होते हैं या फिर यह धंधा इसी तरह फलता फूलता रहेगा ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *