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हिण्डाल्को मूरी में यूनियन विवाद गहराया, सैकड़ों मजदूरों ने जताया विरोध, आमसभा और चुनाव पर उठाए सवाल

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मुरी /राँची | संवाददाता विशेष रिपोर्ट: हिण्डाल्को, मूरी स्थित एल्युमीनियम फैक्ट्री में यूनियन की वैधता और कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ चुका है। फैक्ट्री से जुड़ी मूरी एल्युमीनियम फैक्ट्री वर्कर्स यूनियन (रजिस्ट्रेशन नंबर 263) का पंजीकरण श्रम विभाग द्वारा रद्द कर दिए जाने की पुष्टि सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत हुई है, इसके बावजूद कंपनी द्वारा इस यूनियन को मान्यता देना मजदूरों के बीच आक्रोश का कारण बन गया है।

मजदूरों का आरोप: बिना वैधता के चल रही यूनियन

सूत्रों के अनुसार, यह यूनियन HMS (हिंद मजदूर सभा) से एफिलिएटेड है, लेकिन संगठनात्मक पारदर्शिता की भारी कमी और सदस्यहितों की उपेक्षा के कारण करीब 250 सदस्यों ने अपनी सदस्यता वापस ले ली। इन सदस्यों ने अलग यूनियन बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।

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HMS ने मिलजुल कर चलने की सलाह दी, लेकिन सदस्यता से इनकार

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जब मामला HMS तक पहुँचा, तो संगठन ने दोनों गुटों को एक साथ कार्य करने की सलाह दी। इसके बाद पूर्व सदस्य मजदूरों ने पुनः सदस्यता के लिए आवेदन किया, लेकिन यूनियन ने इनमें से 89 मजदूरों को फिर से सदस्य नहीं बनाया। यह पक्षपातपूर्ण निर्णय मजदूरों में और अधिक नाराजगी का कारण बन गया है ।

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गेट पर धरना, मंदिर में प्रदर्शन, आमसभा में नहीं मिली एंट्री

वंचित मजदूरों ने विरोध स्वरूप मंदिर परिसर में प्रदर्शन किया और हिण्डाल्को गेट पर धरना पर बैठ गए। मजदूरों का आरोप है कि प्रबंधन और कुछ दबंग तत्वों ने उन्हें आमसभा में शामिल होने से रोका गया। इस प्रतिरोध के बावजूद 25 जून 2025 को आमसभा कर पदाधिकारियों का चुनाव कर लिया गया। मजदूरों का दावा है कि यह असंवैधानिक और एकतरफा है।

हस्ताक्षर को लेकर संदेह: मीठा पैकेट के कूपन की आड़ में धोखा?

मजदूरों को संदेह है कि आमसभा से एक दिन पहले मीठा पैकेट के कूपन पर कराए गए हस्ताक्षरों को ही आमसभा की सहमति के रूप में दिखाया जा सकता है। यह कदम पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्पष्ट अवहेलना मानी जा रही है।

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मजदूरों की चार प्रमुख माँगें:

  1. मूरी एल्युमीनियम फैक्ट्री वर्कर्स यूनियन का पंजीकरण वैध है या नहीं, इसकी सरकारी पुष्टि की जाए। यदि नहीं है, तो नया पंजीकरण कराया जाए।
  2. वर्तमान यूनियन में शेष 90 मजदूरों को सदस्यता दी जाए।
  3. न्यायिक पारदर्शिता हेतु SDO (प्रशासन), राँची की निगरानी में आमसभा और चुनाव कराया जाए।
  4. 25 जून 2025 को की गई आमसभा और उसके निर्णयों को रद्द किया जाए।

संघर्ष जारी, निष्पक्ष जांच की माँग

मजदूरों ने प्रशासन से इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की माँग की है। साथ ही यह आशंका जताई है कि यदि समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया, तो उद्योग में श्रम असंतोष और टकराव की स्थिति गहरा सकती है।

मजदूरों की आवाज़ को मिले न्याय

हिण्डाल्को जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रतिष्ठान में श्रमिकों की अनदेखी और संगठनात्मक अनियमितता पर उचित संज्ञान लिया जाना आवश्यक है। झारखंड सरकार, श्रम विभाग और जिला प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और श्रमिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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