धनबाद नीरज सिंह हत्याकांड: झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत, 7 साल से जेल में थे बंद

धनबाद नीरज सिंह हत्याकांड

धनबाद: झारखंड की राजनीति के सबसे चर्चित और सनसनीखेज मामलों में से एक — धनबाद नीरज सिंह हत्याकांड — में बड़ा अपडेट आया है।
झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई है।
संजीव सिंह अपने ही चचेरे भाई और धनबाद के पूर्व मेयर नीरज सिंह की हत्या के आरोप में पिछले सात साल से जेल में बंद थे।

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हत्या की वारदात ने हिला दी थी राजनीति
21 मार्च 2017 को धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र में हुए इस हत्याकांड में नीरज सिंह, उनके बॉडीगार्ड और ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
घटना के तुरंत बाद संजीव सिंह का नाम सामने आया और पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया।
यह मामला न सिर्फ राजनीतिक रूप से संवेदनशील था, बल्कि सिंह परिवार के भीतर आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई ने इसे और भी चर्चित बना दिया।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत
संजीव सिंह ने ज़मानत के लिए कई बार निचली अदालत और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली।
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें सशर्त ज़मानत दे दी।
सूत्रों के अनुसार, अदालत ने उनके ऊपर गवाहों को प्रभावित न करने और जांच में सहयोग करने की शर्तें लगाई हैं।

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सिंह परिवार में चली आ रही है रंजिश
सिंह परिवार झारखंड की कोल बेल्ट राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। नीरज सिंह और संजीव सिंह के बीच कई वर्षों से राजनीतिक और व्यावसायिक विवाद थे, जो समय के साथ गहरी दुश्मनी में बदल गए। हत्या की वारदात ने इस पारिवारिक कलह को और भी खुलकर सामने ला दिया था।

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आगे की सुनवाई जारी रहेगी
ज़मानत मिलने के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ है। अदालत में ट्रायल जारी रहेगा और संजीव सिंह को नियमित रूप से पेश होना होगा।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सात साल बाद उनकी रिहाई झारखंड की राजनीति, खासकर झरिया और धनबाद क्षेत्र में, क्या बदलाव लाती है।

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