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झारखंड में पहली बार गैंगस्टर का आत्मसमर्पणपलामू में डब्लू सिंह ने पुलिस के सामने डाले हथियार, 37 से ज्यादा मामले थे दर्ज

डब्लू सिंह

पलामू, झारखंड
झारखंड की कानून व्यवस्था के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी कुख्यात गैंगस्टर ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया हो। पलामू जिले में कुख्यात अपराधी गौतम कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने पुलिस अधीक्षक रीष्मा रमेशन के सामने आत्मसमर्पण किया। यह घटना न केवल पलामू पुलिस बल्कि पूरे झारखंड पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

पुलिस के दबाव में आया आत्मसमर्पण

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से पलामू पुलिस अपराधियों पर लगातार शिकंजा कस रही थी। पुलिस की रणनीतिक कार्रवाई और दबाव ने अंततः डब्लू सिंह को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया। सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण से पहले वह लगातार पुलिस की निगरानी में था और उसके नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया था।

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37 से अधिक मामले दर्ज

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डब्लू सिंह पर हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे 37 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। कहा जाता है कि वह पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में सक्रिय रहा था। 2021 में उसने कुख्यात अपराधी कुणाल सिंह की हत्या करवाई थी, जिससे उसकी दहशत पूरे पलामू प्रमंडल में फैल गई थी।

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एसपी रीष्मा रमेशन की पहल

आत्मसमर्पण के वक्त पलामू की पुलिस अधीक्षक रीष्मा रमेशन मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि,
“यह झारखंड पुलिस के लिए ऐतिहासिक पल है। डब्लू सिंह जैसे कुख्यात अपराधी का आत्मसमर्पण इस बात का सबूत है कि अपराध और अपराधियों पर कानून का दबाव बढ़ रहा है। हम अपराध मुक्त समाज की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।”

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झारखंड में पहली घटना

यह झारखंड राज्य में पहली बार हुआ है कि किसी बड़े गैंगस्टर ने पुलिस के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया हो। इससे पहले कई अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया, लेकिन किसी गैंगस्टर का खुद पुलिस के सामने हथियार डालना पुलिस की बड़ी कामयाबी है।

अपराध जगत का डॉन बना ‘डब्लू सिंह’

डब्लू सिंह का असली नाम गौतम कुमार सिंह है। पलामू जिले के ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखने वाला यह युवक धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में उतरा। शुरू में उसने स्थानीय स्तर पर अवैध वसूली का धंधा शुरू किया, लेकिन बाद में हथियारबंद गिरोह बना लिया। उसके गिरोह में दर्जनों सक्रिय सदस्य थे, जो हत्या और रंगदारी की वारदातों को अंजाम देते थे।

आत्मसमर्पण के पीछे वजह

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में पुलिस ने उसके कई साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। गिरोह की ताकत लगातार कमजोर हो रही थी। साथ ही पुलिस की सख्ती और स्थानीय स्तर पर मिल रही मुखबिरी से उसका ठिकाना बदलना मुश्किल हो गया था। ऐसी परिस्थिति में उसने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।

लोगों में बढ़ा भरोसा

इस आत्मसमर्पण के बाद स्थानीय लोगों में भी पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। पलामू और आसपास के इलाकों के लोग डब्लू सिंह के आतंक से वर्षों से परेशान थे। उसके आत्मसमर्पण से आम जनता को बड़ी राहत मिली है।

भविष्य में क्या होगा?

अब पुलिस और न्यायालय की संयुक्त कार्रवाई के बाद तय होगा कि डब्लू सिंह को किस तरह की सजा मिलेगी। हालांकि पुलिस का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से कई पुराने आपराधिक मामलों के राज खुल सकते हैं।

डब्लू सिंह का आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस के लिए ऐतिहासिक सफलता है। यह घटना न केवल अपराध जगत में पुलिस के बढ़ते दबाव का संकेत है, बल्कि आने वाले दिनों में अन्य अपराधियों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश है। झारखंड की जनता उम्मीद कर रही है कि इस आत्मसमर्पण के बाद राज्य अपराध मुक्त समाज की ओर एक और कदम बढ़ा चुका है।

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