NDA ने घोषित किया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार: महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन
cp radhakrishnan महाराष्ट्र के राज्यपाल, झारखंड-तेलंगाना-पुडुचेरी का संभाल चुके हैं प्रभार, भाजपा के सीनियर नेता
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने आखिरकार उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि सीपी राधाकृष्णन NDA की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। नड्डा ने कहा कि भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक विशेष रूप से इसी मुद्दे पर बुलाई गई थी और लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगी। इस घोषणा के साथ ही उपराष्ट्रपति चुनाव का समीकरण साफ हो गया है।
वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल
सीपी राधाकृष्णन इस समय महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। उन्होंने 31 जुलाई 2024 को इस पद की शपथ ली थी। उनके कार्यकाल को अब तक संतुलित और संवैधानिक जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने वाला माना जाता है। राज्यपाल पद से पहले भी उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। यही वजह है कि उन्हें भाजपा का भरोसेमंद और अनुभवी नेता माना जाता है।
झारखंड, तेलंगाना और पुडुचेरी का भी संभाला प्रभार
राधाकृष्णन के पास प्रशासनिक अनुभव की लंबी सूची है। फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक वे झारखंड के राज्यपाल रहे।इसी दौरान मार्च से जुलाई 2024 तक उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। यही नहीं, उन्हें पुडुचेरी के उपराज्यपाल की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह तथ्य उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव को दर्शाता है, जिसने उन्हें भाजपा और NDA के भीतर एक भरोसेमंद चेहरा बनाया।
भाजपा संगठन में लंबा अनुभव
सीपी राधाकृष्णन भाजपा के पुराने और वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। दक्षिण भारत में पार्टी को मजबूत बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। भाजपा संगठन में उन्होंने कई पदों पर कार्य किया और पार्टी विस्तार में रणनीतिक योगदान दिया। पार्टी के लिए उनकी निष्ठा और संगठनात्मक क्षमता हमेशा सराही जाती रही है।
NDA का रणनीतिक दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीपी राधाकृष्णन का नाम आगे कर NDA ने दक्षिण भारत पर खास दांव खेला है। यह कदम भाजपा के लिए तमिलनाडु और आसपास के राज्यों में अपनी पैठ मजबूत करने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।दक्षिण भारत में लंबे समय से भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। ऐसे में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राधाकृष्णन का चयन उस क्षेत्र में भाजपा का आत्मविश्वास और दीर्घकालिक रणनीति दिखाता है।
चुनावी समीकरण
अब सबकी निगाहें विपक्षी गठबंधन पर टिक गई हैं कि वे किसे उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाते हैं।
संख्याबल के लिहाज से देखा जाए तो NDA की स्पष्ट बढ़त है। संसद के दोनों सदनों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों का आंकड़ा विपक्ष से ज्यादा है। इसलिए राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना लगभग तय है। हालांकि, विपक्षी उम्मीदवार की घोषणा के बाद मुकाबले की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।
उपराष्ट्रपति पद का महत्व
उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। वह राज्यसभा के सभापति भी होते हैं और संसदीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस पद पर किसी ऐसे नेता को बैठाना जो न सिर्फ अनुभवी हो बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से संतुलित भी हो, NDA की रणनीति का अहम हिस्सा है।
सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना भाजपा और NDA के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। उनका प्रशासनिक अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और दक्षिण भारत से जुड़ाव इस चुनाव को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। अगर संख्याबल की बात करें तो NDA का पलड़ा भारी है और राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष किस नाम के साथ मैदान में उतरता है और मुकाबला कितना रोचक बनता है।



