रामदास सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संभाली शिक्षा और निबंधन विभाग की जिम्मेदारी

Hemant Soren Education Minister Jharkhand Hemant Soren Education Minister Jharkhand

रांची: झारखंड की राजनीति में 15 अगस्त का दिन एक गहरे सदमे की तरह आया। राज्य के शिक्षा मंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वे 2 अगस्त को अपने जमशेदपुर स्थित आवास में बाथरूम में फिसलकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सिर में चोट और ब्रेन हेमरेज के चलते उनकी हालत बिगड़ती चली गई और लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।

Maa RamPyari Hospital

रामदास सोरेन के निधन को झारखंड की राजनीति ही नहीं बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी गहरी क्षति माना जा रहा है। वे आदिवासी समाज के एक प्रमुख चेहरे थे और लंबे समय से झामुमो की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके निधन से न केवल संगठनात्मक स्तर पर बल्कि कैबिनेट की कार्यशैली पर भी असर पड़ा है।

हेमंत सोरेन ने खुद संभाली जिम्मेदारी
रामदास सोरेन के निधन के बाद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मुख्यमंत्री की सलाह पर एक अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के मुताबिक अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और निबंधन विभाग का कार्यभार देखेंगे। यह फैसला प्रशासनिक दृष्टिकोण से तो तात्कालिक है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ भी गहरे हैं। मुख्यमंत्री पहले से ही कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब शिक्षा और निबंधन जैसे बड़े और संवेदनशील विभाग सीधे उनके अधीन आ गए हैं।

whatsapp channel

Maa RamPyari Hospital

क्यों अहम है शिक्षा मंत्रालय?
झारखंड में शिक्षा विभाग हमेशा से विवाद और सुधार की राजनीति का केंद्र रहा है। सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षक नियुक्ति, डिजिटल शिक्षा की चुनौती, और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की बदहाल स्थिति बार-बार चर्चा में रहती है। रामदास सोरेन इन मुद्दों पर लगातार काम कर रहे थे।

paras-trauma
ccl

अब यह जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री पर आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे हेमंत सोरेन पर सीधा दबाव बढ़ेगा। उन्हें विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था पर हमेशा से जनता की गहरी नजर रहती है।

the-habitat-ad

निबंधन विभाग का भी बड़ा महत्व
निबंधन विभाग को राजस्व संग्रह के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क और उससे होने वाली आय सरकार के खजाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। विपक्ष अक्सर इस विभाग में भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों के आरोप लगाता रहा है। ऐसे में इस विभाग का सीधा जिम्मा मुख्यमंत्री के हाथ में आना राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़ा संदेश है।

adani
15 aug 10

विपक्ष का हमला
झारखंड में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इस फैसले पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पहले से ही कई मोर्चों पर विफल साबित हो रहे हैं और अब उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां देकर राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को और जटिल बना दिया गया है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा – “हेमंत सोरेन जनता की समस्याओं को हल करने में असफल रहे हैं। शिक्षा विभाग की हालत पहले से खराब है। अब मुख्यमंत्री के पास समय ही नहीं होगा कि वे इस मंत्रालय को प्राथमिकता दे सकें।”

झामुमो की रणनीति
दूसरी ओर, झामुमो इसे मजबूरी नहीं बल्कि अवसर की तरह पेश कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री खुद मंत्रालय का काम देखेंगे ताकि शिक्षा सुधार की दिशा में तेज़ी लाई जा सके। पार्टी का मानना है कि इससे जनता का भरोसा भी बढ़ेगा कि मुख्यमंत्री स्वयं इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में दखल दे रहे हैं।

आगे की चुनौतियां
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कितने लंबे समय तक यह जिम्मेदारी संभालेंगे। क्या जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल कर किसी नए मंत्री को शिक्षा और निबंधन विभाग दिया जाएगा? या फिर मुख्यमंत्री इसे 2024 की लोकसभा और 2025 की विधानसभा चुनाव तक अपने पास ही रखेंगे ताकि पार्टी की छवि बेहतर बनाई जा सके? विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि हेमंत सोरेन इन दोनों विभागों में कुछ ठोस सुधार दिखा पाए, तो यह उनकी नेतृत्व क्षमता को मजबूत करेगा। लेकिन यदि स्थिति बिगड़ती है तो विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकता है।

रामदास सोरेन के निधन ने झारखंड की राजनीति और कैबिनेट की शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है। अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास अतिरिक्त जिम्मेदारी है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टिकोण से तात्कालिक समाधान है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ दूरगामी साबित हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *