गौतम अदाणी का आह्वान: भारत को चाहिए ‘दूसरा स्वतंत्रता संग्राम’, अब जंग होगी डेटा और तकनीक की

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आईआईटी खड़गपुर की हीरक जयंती समारोह के अवसर पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत को नए युग की सबसे बड़ी चुनौती से निपटने का आह्वान किया। उन्होंने इसे “दूसरा स्वतंत्रता संग्राम” बताया और कहा कि यह संग्राम औपनिवेशिक शासन के खिलाफ नहीं, बल्कि विदेशी तकनीक, ऊर्जा और डेटा पर बढ़ती निर्भरता के खिलाफ होगा। अदाणी ने कहा कि अब जंग बंदूकों से नहीं, बल्कि सर्वर, एल्गोरिदम और डेटा पर लड़ी जाएगी। “आज के युद्ध अक्सर अदृश्य होते हैं। ये सर्वर फ़ार्म में लड़े जाते हैं, खाइयों में नहीं। हथियार अब एल्गोरिदम हैं, बंदूकें नहीं। साम्राज्य अब ज़मीन पर नहीं, बल्कि डेटा सेंटरों में बनते हैं।”

“आजाद हुए लेकिन आत्मनिर्भर नहीं”
अपने संबोधन में गौतम अदाणी ने कहा कि भारत ने भले ही 1947 में राजनीतिक आजादी हासिल कर ली थी, लेकिन आज भी विदेशी तकनीक, आयातित सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता देश को असुरक्षित बनाती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “सच्ची आज़ादी आत्मनिर्भरता में है। जब तक हम विदेशी सेमीकंडक्टर या ऊर्जा पर निर्भर हैं, तब तक हम पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हो सकते।” उन्होंने आईआईटी के छात्रों को “भारत के नए स्वतंत्रता सेनानी” बताते हुए कहा कि उनके हथियार विचार, नवाचार और विज्ञान होंगे। अदाणी ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण की राह चुनने की अपील की। उन्होंने कहा, “एक रास्ता आपको वेतन तक ले जाता है, दूसरा आपको विरासत तक। सिर्फ एक ही राह है जो भारत निर्माण के गौरव तक ले जाती है।”

छात्रों को दी प्रेरणा, सुनाई अपनी कहानी
अदाणी ने इस मौके पर अपनी जीवन यात्रा भी छात्रों के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे 16 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़कर मुंबई का सफर किया और वहां से धीरे-धीरे भारत के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर समूह की नींव रखी। उन्होंने कहा कि एक सफल बिजनेसमैन वही बन सकता है जो स्वतंत्र विचार रखता हो, जोखिम उठाने का साहस रखता हो और असफलता से डरता न हो। उन्होंने कहा कि किसी भी निजी कंपनी की तरक्की तब तक संभव नहीं है जब तक वह सरकार की दूरदर्शी नीतियों के साथ तालमेल न बैठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में सरकार और उद्योग के बीच भरोसे ने भारत की प्रगति को गति दी है और इसी भरोसे ने अदाणी समूह को देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर समूह बना दिया।

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नई फैलोशिप की घोषणा: छात्रों के लिए बड़ा तोहफा
आईआईटी खड़गपुर की हीरक जयंती समारोह को यादगार बनाने के लिए गौतम अदाणी ने ‘आईआईटी प्लैटिनम जुबली चेंज मेकर्स फ़ेलोशिप’ की शुरुआत की घोषणा की। यह फेलोशिप सभी आईआईटी संस्थानों में शुरू की जाएगी और आईआईटी खड़गपुर द्वारा समन्वित होगी। इस फेलोशिप का मकसद देश की शीर्ष प्रतिभाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ी परियोजनाओं से जोड़ना है। खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में युवाओं को शामिल करने की योजना है। अदाणी ने कहा कि “विश्वविद्यालय और कॉर्पोरेट जगत को मिलकर न केवल बाज़ारों में बल्कि समाज के ताने-बाने में भी बदलाव लाने के लिए साथ आना होगा।”

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“इतना मजबूत बनो कि कोई डर न जकड़े”
अपने भाषण के समापन में अदाणी ने छात्रों को भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा,
“इतना मज़बूत बनो कि कोई भी डर हमें जकड़ न सके। इतना ऊंचा उठो कि कोई साम्राज्य हमें झुका न सके। इतना आगे बढ़ो कि कोई ताकत हमें रोक न सके। हमारा भारत तुम्हारा इंतजार कर रहा है।”

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गौतम अदाणी का यह भाषण छात्रों के बीच गहरी छाप छोड़ गया। कार्यक्रम के बाद आईआईटी खड़गपुर के छात्र और शिक्षक उनके विचारों और दृष्टिकोण से प्रभावित दिखे। विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी का यह संदेश भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वाभिमान की दिशा में एक नए विमर्श की शुरुआत है।

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