झारखंड चुनाव: इंडिया ब्लॉक और एनडीए की जोरदार टक्कर, कल्पना और हिमंता पर सबकी नजरें

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रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव का प्रचार सोमवार को थम गया, और 20 नवंबर को दूसरे चरण के मतदान के साथ चुनावी माहौल शांत हो जाएगा। यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच एक निर्णायक जंग है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीए के लिए मैदान संभाला, वहीं इंडिया ब्लॉक की ओर से हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाल रखा है।

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इस बार की लड़ाई केवल गठबंधनों की ताकत पर नहीं, बल्कि नेताओं की व्यक्तिगत अपील और उनके जनाधार पर भी केंद्रित है। इस कड़ी में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं – कल्पना सोरेन और हिमंता बिस्वा सरमा।


कल्पना सोरेन: झारखंड में ‘सुपर स्टार प्रचारक’ का उदय

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कल्पना सोरेन ने इस चुनाव में इंडिया ब्लॉक की ओर से प्रचार में अग्रणी भूमिका निभाई। राजनीति में नए कदम रखने के बावजूद उन्होंने झारखंड के हर कोने में जनसंपर्क किया।
वह झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की “स्टार प्रचारक” बनकर उभरीं और महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने इंडिया ब्लॉक के पक्ष में लहर पैदा की।

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कल्पना सोरेन ने न केवल इंडिया ब्लॉक के प्रचार को गति दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत से जनता का दिल जीत लिया। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और परिवार में आई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बाद उन्होंने पार्टी की कमान संभाली और इसे नई दिशा दी।

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2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी मेहनत रंग लाई, जब झारखंड में इंडिया ब्लॉक ने पांच सीटें जीतीं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसदों की संख्या तीन हो गई। कल्पना ने खुद उपचुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया, और अब वह झारखंड में “महिलाओं की आवाज” के रूप में देखी जा रही हैं।


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हिमंता बिस्वा सरमा: बीजेपी का “चाणक्य” झारखंड में सक्रिय

दूसरी ओर, एनडीए की रणनीति में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनकी छवि एक तेज-तर्रार रणनीतिकार की है, जिन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी को मजबूत किया।
हिमंता ने झारखंड में एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में ताबड़तोड़ रैलियां कीं और जनजातीय समुदाय को साधने की कोशिश की।

उनकी लोकप्रियता और भाषण शैली ने बीजेपी के प्रचार में एक नया जोश भरा। हिमंता ने झारखंड की जनता को केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का हवाला देते हुए एनडीए के लिए वोट मांगे।


मोदी और शाह का दावा: 50 सीटें जीतकर बनाएंगे सरकार

एनडीए के प्रचार की कमान पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने संभाली। शाह ने झारखंड में 50 सीटें जीतने का दावा किया है। पीएम मोदी ने अपने भाषणों में झारखंड के विकास को प्राथमिकता देने और स्थिर सरकार की जरूरत पर जोर दिया।

जेपी नड्डा और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेता भी झारखंड के हर क्षेत्र में पहुंचे और एनडीए को सत्ता में लाने की अपील की।


महिला वोटर्स पर टिकी नजरें: कल्पना बनाम हिमंता

इस चुनाव में महिलाओं का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। कल्पना सोरेन ने महिला सशक्तिकरण की बात को अपने प्रचार का केंद्र बनाया। उन्होंने महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं को प्रमुखता से उठाया।

दूसरी ओर, हिमंता बिस्वा सरमा ने विकास, सुरक्षा और स्थिरता के नाम पर महिलाओं को आकर्षित करने की कोशिश की।


क्या जनता देगी स्पष्ट जनादेश?

झारखंड की राजनीति में गठबंधन की सरकारें हमेशा अस्थिरता का शिकार रही हैं। अगर जनता ने इस बार भी स्पष्ट जनादेश नहीं दिया, तो फ्रैक्चर्ड मैंडेट के कारण दोबारा चुनाव की स्थिति बन सकती है।


नतीजे तय करेंगे झारखंड का भविष्य

एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों ही अपने दावों में मजबूत हैं, लेकिन नतीजे यह तय करेंगे कि झारखंड की जनता किस पर भरोसा करती है।
क्या झारखंड में कल्पना सोरेन का करिश्मा चलेगा, या हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति जीत दिलाएगी? 20 नवंबर के मतदान और इसके बाद के नतीजे ही इस सवाल का जवाब देंगे।

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