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भाजपा प्रत्याशी सत्येंद्रनाथ तिवारी का नामांकन रद्द करने के लिए निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप कुमार तिवारी ने उच्च न्यायालय में दायर की याचिका

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गढ़वा : गढ़वा विधानसभा में इस चुनावी माहौल में एक नया मोड़ आ गया है, जहां निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप कुमार तिवारी ने भाजपा प्रत्याशी सत्येंद्रनाथ तिवारी के नामांकन को चुनौती देते हुए झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। तिवारी का आरोप है कि सत्येंद्रनाथ तिवारी ने नामांकन पत्र में चुनाव आयोग द्वारा अनिवार्य नो ड्यूज सर्टिफिकेट संलग्न नहीं किया है, जो चुनावी नियमों के तहत आवश्यक है।

तिवारी के मुताबिक, चुनाव आयोग की नियमावली के अनुसार, वर्तमान या पूर्व विधायकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे नामांकन के साथ पिछले दस वर्षों का नो ड्यूज सर्टिफिकेट संलग्न करें। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्येंद्रनाथ तिवारी ने यह सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया था, लेकिन इस बार इसे नहीं जोड़ा गया। तिवारी ने निर्वाची पदाधिकारी गढ़वा को भी इस मुद्दे पर लिखित शिकायत दी थी और नामांकन रद्द करने का आग्रह किया था। हालांकि, निर्वाची पदाधिकारी ने इसे “मामूली चूक” मानते हुए नामांकन को स्वीकार कर लिया, जिससे तिवारी और अन्य प्रत्याशियों में असंतोष फैल गया है।

दिलीप कुमार तिवारी ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को इस संबंध में शिकायत भेजी है। उनके अनुसार, निर्वाची पदाधिकारी का यह फैसला पक्षपातपूर्ण है और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। इसी के चलते तिवारी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्याय की मांग की है। याचिका में उन्होंने सत्येंद्रनाथ तिवारी का नामांकन रद्द करने का आग्रह किया है ताकि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

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चुनावी माहौल में इस मामले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, और सभी की नजरें अब उच्च न्यायालय के फैसले पर टिक गई हैं, जिससे यह तय होगा कि गढ़वा में भाजपा के उम्मीदवार सत्येंद्रनाथ तिवारी चुनावी दौड़ में बने रहेंगे या नहीं।

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