शिबू सोरेन का मोरहाबादी आवास अब रूपी सोरेन के नाम, आजीवन आवंटन का होगा फैसला

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रांची से बड़ी खबर:झारखंड की राजनीति और आंदोलन की धुरी रहे दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन का रांची स्थित मोरहाबादी सरकारी आवास अब उनकी पत्नी रूपी सोरेन को आवंटित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर भवन निर्माण विभाग ने इस प्रस्ताव को तैयार कर लिया है और इसे 2 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। इस पर अंतिम मुहर लगने के बाद यह आवास आजीवन रूपी सोरेन के नाम दर्ज हो जाएगा।

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आंदोलन और राजनीति का गवाह रहा यह आवास
मोरहाबादी स्थित यह आवास सिर्फ एक मकान नहीं है, बल्कि झारखंड आंदोलन और राज्य की राजनीति का जीवंत गवाह है। शिबू सोरेन ने दशकों तक इसी आवास से राजनीतिक गतिविधियों का संचालन किया। यहीं पर कार्यकर्ताओं से मुलाकातें होती रहीं, आदिवासी समाज की समस्याओं पर रणनीतियां बनीं और झारखंड आंदोलन की कई ऐतिहासिक बैठकें आयोजित हुईं। यह स्थान आदिवासी समाज और झामुमो कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा से ‘राजनीतिक धरोहर’ के रूप में देखा जाता रहा है।

शिबू सोरेन की विरासत को सम्मान
शिबू सोरेन का राजनीतिक और सामाजिक जीवन झारखंड की आत्मा से गहराई से जुड़ा रहा है। उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष किया, आदिवासी अधिकारों की रक्षा की और झारखंड राज्य के गठन की लड़ाई का नेतृत्व किया। उनके संघर्षों के कारण ही वे ‘दिशोम गुरु’ के नाम से पहचाने गए।
ऐसे में सरकार का यह फैसला उनकी विरासत को सम्मान देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह आवास उनकी पत्नी रूपी सोरेन को जीवन भर के लिए देने से न केवल उनके परिवार को सुविधा मिलेगी, बल्कि यह भावी पीढ़ी के लिए शिबू सोरेन के संघर्ष की यादों को भी संजोकर रखेगा।

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राजनीतिक और सामाजिक संकेत
इस फैसले को केवल प्रशासनिक कदम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और हेमंत सोरेन सरकार ने यह निर्णय सोच-समझकर लिया है। आदिवासी समाज में शिबू सोरेन की छवि अब भी सबसे बड़ी है और उनका नाम चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में मोरहाबादी आवास को रूपी सोरेन को आजीवन देने का निर्णय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सकारात्मक संदेश देगा। यह संदेश जाएगा कि सरकार अपने संस्थापक नेताओं और उनके परिवारों को भूलती नहीं है, बल्कि उनकी विरासत को संरक्षित करती है।

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कैबिनेट की बैठक में औपचारिक मुहर
भवन निर्माण विभाग ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है। अब 2 सितंबर को होने वाली राज्य कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी के लिए रखा जाएगा। सूत्रों की मानें तो इस पर किसी तरह का विरोध संभव नहीं है और इसे आसानी से पास कर दिया जाएगा। एक बार कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही यह आवास आधिकारिक रूप से रूपी सोरेन के नाम पर आजीवन आवंटित हो जाएगा।

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झामुमो कार्यकर्ताओं में उत्साह
यह खबर सामने आने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है। उनका मानना है कि यह निर्णय शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान की मान्यता है। झामुमो कार्यकर्ताओं का कहना है कि मोरहाबादी आवास सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति का मंदिर है, जिसे अब रूपी सोरेन के नाम से जोड़े जाने से आंदोलन की विरासत और मजबूत होगी।

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आगामी चुनाव और संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आगामी चुनावी माहौल में झामुमो के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। शिबू सोरेन की स्मृतियां झारखंड की राजनीति में आज भी वोट बैंक को प्रभावित करती हैं। उनकी पत्नी को यह आवास आवंटित करने का कदम आदिवासी समाज और कार्यकर्ताओं के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा करेगा।

शिबू सोरेन का मोरहाबादी आवास उनके जीवन और संघर्षों का प्रतीक है। अब जब यह आवास उनकी पत्नी रूपी सोरेन को आजीवन देने की तैयारी है, तो यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीतिक विरासत को सहेजने का प्रयास भी है। आने वाले समय में यह निर्णय राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश देगा और शिबू सोरेन की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखेगा।

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