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रामगढ़ में स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की डीसी ने की CID जांच की अनुशंसा

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रामगढ़ : रामगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच के बाद, डीसी ने मामले की आगे की जांच के लिए CID जांच की अनुशंसा कर दी है। प्रारंभिक जांच में लगभग 4 करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला है, और जांच के दौरान राशि बढ़ने की संभावना है। डीसी ने कहा कि उनकी जांच का दायरा सीमित है, इसलिए CID जांच जरूरी है।

रामगढ़ के चार मुख्य घोटाले:

TDS घोटाला : TDS के नाम पर लगभग 56 लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। इसमें से 80 हजार रुपये का घोटाला तत्कालीन सिविल सर्जन प्रभात कुमार के कार्यकाल में हुआ, जो वर्तमान में रांची सीएस पद पर तैनात हैं। बाकी राशि वर्तमान सीएस महालक्ष्मी के समय निकाली गई। रामगढ़ सीएस का कहना है कि DPM देवेंद्र भूषण श्रीवास्तव और DAM की स्वीकृति के बाद ही उन्होंने फाइलों पर हस्ताक्षर किए।

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फर्जी डॉक्टर वेतन घोटाला : पिछले चार वर्षों में फर्जी डॉक्टरों के नाम पर लगभग 3 करोड़ रुपये की निकासी की गई। जनवरी 2021 में, तत्कालीन CS प्रभात कुमार और DAM हिना अग्रवाल ने 5 फर्जी डॉक्टरों के लिए पे आईडी बना दी। इसमें से 4 डॉक्टरों के खाते अनुसेवक अमजद हुसैन के नाम पर थे, और एक खाते की मालिक अमजद हुसैन की पत्नी सरिता वर्जीनिया थीं। इन डॉक्टरों की मासिक उपस्थिति के बिना हर महीने लाखों रुपये की फर्जी निकासी होती रही।

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NHRM के 5 खाते बिना विवरण के : NHRM के 5 खातों की कोई संचिका, चेक बुक, या लॉग बुक कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इन खातों की जांच नहीं हो सकी है, लेकिन CID जांच में कई और चौकाने वाले मामले सामने आने की संभावना है।

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फायर इक्विपमेंट घोटाला : बिना किसी काम के 1 करोड़ 20 लाख रुपये की निकासी की गई। टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए धनबाद की कंपनी कार्लोंग एडवर्टाइजिंग एंड ब्रांडिंग सॉल्यूशन को टेंडर दिया गया। टेंडर की पूरी राशि एडवांस में दी गई, जबकि कोई कार्य प्रगति रिपोर्ट नहीं दी गई थी।

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सरकारी कार्रवाई का अभाव: इस बड़े घोटाले के बावजूद राज्य सरकार द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रारंभिक जांच में शामिल सिविल सर्जन, DAM, और DPM पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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