जामताड़ा से शुरू हुआ झारखंड फाइलेरिया मुक्त मिशन, 2027 तक लक्ष्य हासिल करने का संकल्प

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने MDA अभियान की शुरुआत करते हुए मंच से ली फाइलेरिया रोधी दवा, कहा — “हर हाल में जीतेंगे फाइलेरिया से जंग”
जामताड़ा: जामताड़ा की धरती एक बार फिर झारखंड के इतिहास में एक नए स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की गवाह बनी है। राज्य के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने यहां से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य 2027 तक झारखंड को पूरी तरह फाइलेरिया मुक्त बनाना है।


मंत्री ने खुद मंच से ली दवा, दिया संदेश
अभियान के उद्घाटन अवसर पर डॉ. अंसारी ने मंच से ही फाइलेरिया रोधी दवा की खुराक ली और पूरे राज्य के लोगों को यह संदेश दिया —
“मैंने दवा ली है, आप भी लें। हम सब मिलकर झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाएंगे।”
उन्होंने कहा कि फाइलेरिया न केवल शारीरिक अपंगता का कारण बनता है, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मसम्मान, आजीविका और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। हालांकि, यह बीमारी आसानी से रोकी जा सकती है — साल में केवल एक बार दी जाने वाली दवा से।



MDA अभियान के मुख्य लक्ष्य
- 2027 तक झारखंड को फाइलेरिया मुक्त घोषित करना।
- हर पात्र नागरिक को फाइलेरिया रोधी दवा उपलब्ध कराना।
- फाइलेरिया प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
- सरकार की पहल और सुविधाएं
- प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया रोकथाम गतिविधियों का संचालन।
- प्रभावित लोगों को विशेष चप्पल का वितरण।
- हाइड्रोसील ऑपरेशन की मुफ्त सुविधा।
- विकलांगता प्रमाणपत्र की आसान उपलब्धता।


मंत्री ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव का सबसे आसान तरीका है — स्वयं दवा लेना और अपने परिवार को भी दवा दिलाना।


जामताड़ा से शुरुआत क्यों?
डॉ. अंसारी ने कहा,
“जामताड़ा के लोगों की दुआओं से मैं विधायक और मंत्री बना हूं। इसलिए, राज्य के किसी भी बड़े अभियान की शुरुआत सबसे पहले जामताड़ा से ही होगी।”
उन्होंने विपक्ष की आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी —“जहां काम होता है, वहीं आलोचना होती है। मैं रुकने वाला नहीं हूं, दिन-रात विभाग को मजबूत बनाने में जुटा हूं।”
जन-भागीदारी पर जोर
मंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि इसे जन-आंदोलन बनाना होगा। इसमें गांव, पंचायत, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और मीडिया को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा,
“सबसे पहले खुद दवा लें, फिर अपने बच्चों, परिवार और पड़ोसियों को भी दवा लेने के लिए प्रेरित करें। तभी हम फाइलेरिया पर जीत पाएंगे।”
फाइलेरिया — एक नजर में
फाइलेरिया, जिसे हाथीपांव रोग भी कहा जाता है, एक परजीवी जनित बीमारी है जो मच्छरों के काटने से फैलती है। यह शरीर के अंगों में सूजन और स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती है। दवा का सालाना सेवन इस संक्रमण को फैलने से रोक देता है।
2027 तक का रोडमैप
स्वास्थ्य विभाग ने इस मिशन के लिए एक सुस्पष्ट रणनीति बनाई है:
- प्रत्येक प्रखंड में जागरूकता अभियान।
- घर-घर जाकर दवा वितरण।
- सभी स्वास्थ्यकर्मियों और स्वंयसेवकों का प्रशिक्षण।
- मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरण।
स्वस्थ झारखंड, सक्षम झारखंड
मंत्री अंसारी ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि फाइलेरिया मुक्त झारखंड सिर्फ एक स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और आर्थिक लक्ष्य भी है। स्वस्थ नागरिक ही राज्य को सशक्त और आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
उन्होंने जनता से हाथ जोड़कर अपील की,
“यह सिर्फ सरकार का अभियान नहीं, बल्कि हमारा साझा संकल्प है। आइए, हाथ से हाथ मिलाकर इस मिशन को सफल बनाएं।”
MDA अभियान का शुभारंभ जामताड़ा से हुआ है, लेकिन इसकी गूंज पूरे झारखंड में सुनाई देगी। अगर हर नागरिक इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाए, तो 2027 से पहले ही झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।