झारखंड शराब घोटाला: आरोपी IAS विनय चौबे को ACB कोर्ट से मिली जमानत, राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

रांची: झारखंड की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मचाने वाले बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे को बड़ी राहत मिली है। रांची स्थित एसीबी (ACB) कोर्ट ने उन्हें शनिवार को जमानत दे दी। कोर्ट ने BNSS की धारा 187(2) के तहत यह राहत प्रदान की है, लेकिन इसके साथ ही कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं।

किन शर्तों के साथ मिली बेल?
एसीबी कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि विनय चौबे को राज्य से बाहर जाने से पहले कोर्ट को सूचना देनी होगी। ट्रायल की पूरी अवधि में उन्हें अपना मोबाइल नंबर बदलने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा, उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके भी भरने होंगे।
यह शर्तें इस बात का संकेत देती हैं कि कोर्ट अब भी मामले की गंभीरता को लेकर सतर्क है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आरोपी मुकदमे की प्रक्रिया में बाधा न डालें।
क्या है शराब घोटाला?
झारखंड में पिछले साल खुलासा हुए इस घोटाले ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था। आरोप है कि राज्य में शराब की सप्लाई और बिक्री से जुड़ी नीतियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ।
सूत्रों के अनुसार, शराब सप्लाई से लेकर रेवेन्यू कलेक्शन तक में कई करोड़ रुपये का हेरफेर किया गया। इस मामले में ACB ने कई कारोबारी, सरकारी अधिकारी और ठेकेदारों को आरोपी बनाया। इन्हीं में से एक बड़ा नाम था IAS विनय चौबे का, जो राज्य में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
विनय चौबे की गिरफ्तारी और जेल यात्रा
विनय चौबे पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में शराब सप्लाई से जुड़ी नीतियों में गंभीर अनियमितताओं को बढ़ावा दिया। जांच एजेंसियों ने उन्हें लंबे समय तक पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जेल भेजे जाने के बाद उनके वकीलों ने बार-बार कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई थी। कई बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद आखिरकार ACB कोर्ट ने उन्हें राहत दी।


राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
IAS विनय चौबे को जमानत मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी पार्टियां इसे सरकार और प्रशासन की नाकामी से जोड़कर देख रही हैं। उनका कहना है कि इस घोटाले में केवल अफसर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण भी शामिल था।
बीजेपी के नेताओं ने पहले ही यह आरोप लगाया था कि झारखंड में शराब कारोबार को लेकर ‘पॉलिटिकल-ऑफिशियल नेक्सस’ है। अब विनय चौबे की जमानत के बाद विपक्ष इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है।

प्रशासनिक जगत में भी बड़ा असर
झारखंड के प्रशासनिक हलकों में भी यह मामला लगातार चर्चा का विषय रहा है। विनय चौबे जैसे सीनियर IAS पर घोटाले का आरोप लगना पूरे ब्यूरोक्रेसी सिस्टम की साख पर धब्बा माना गया।
अब जब उन्हें जमानत मिली है, तब भी कई अधिकारी इसे सिर्फ कानूनी राहत मान रहे हैं, क्योंकि ट्रायल अभी बाकी है।


आने वाले दिनों में क्या होगा?
जमानत मिल जाने के बावजूद विनय चौबे को क्लीन चिट नहीं मिली है। अब भी उन्हें अदालत के सामने अपनी निर्दोषता साबित करनी होगी। ACB की ओर से दायर चार्जशीट और गवाहियों पर आगे सुनवाई होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में शराब घोटाला एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और ‘गुड गवर्नेंस’ के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा।
IAS विनय चौबे को मिली जमानत ने फिलहाल उन्हें और उनके परिवार को राहत दी है, लेकिन यह राहत अस्थायी है। पूरा मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। झारखंड शराब घोटाला केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे कोर्ट की सुनवाई किस दिशा में जाती है और क्या इस पूरे घोटाले में अन्य बड़े नामों का भी खुलासा होता है या नहीं।