झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने अवैध बहाली और श्रमिक अधिकारों पर उठाए गंभीर सवाल, आंदोलन की दी चेतावनी

रांची: झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने राज्य में अवैध बहाली, श्रमिकों के अधिकारों के उल्लंघन और वेतन कटौती जैसे गंभीर मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाई है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महाप्रबंधक (तकनीकी), विद्युत आपूर्ति क्षेत्र रांची, मनमोहन कुमार से मुलाकात की। बैठक के दौरान, संघ ने अपनी शिकायतों और सुझावों का एक लिखित ज्ञापन सौंपा और इन समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की।

संघ का आरोप: अवैध बहाली और श्रमिकों के साथ अन्याय
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने यह आरोप लगाया कि गुमला और सिमडेगा डिवीजन में अवैध बहाली हो रही है। बिना किसी नियमित प्रक्रिया या नई सीट आवंटन के नए मानव दिवस कर्मियों को बहाल किया जा रहा है। वहीं, पुराने और अनुभवी कर्मियों की उपेक्षा की जा रही है।
संघ ने दावा किया कि विभाग में कई वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को दरकिनार करते हुए नए कर्मियों को भर्ती किया गया है, जो न केवल न्याय के खिलाफ है बल्कि श्रमिक अधिकारों के हनन का भी मामला है।


वेतन में कटौती और मनमानी का आरोप

संघ ने कहा कि विभाग द्वारा कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की जा रही है। जहां कर्मचारियों को 30-31 दिन के वेतन का भुगतान होना चाहिए, उन्हें केवल 22-23 दिन का वेतन मिल रहा है।


जबरन एलआईसी पॉलिसी लेने का दबाव
सिमडेगा के पदाधिकारी राम नंदन राम पर आरोप लगाते हुए संघ ने कहा कि उन्होंने अपने रिश्तेदार के नाम पर एजेंट कोड आवंटित कराकर कर्मियों की तनख्वाह काटी और उन्हें जबरन एलआईसी पॉलिसी लेने के लिए मजबूर किया। संघ ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय और मनमानी बताया।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का उल्लंघन
संघ ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की धारा 3, उपधारा 1 (बी) के तहत झारखंड सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कर्मचारियों को 30 और 31 दिन का वेतन दिया जाए। हालांकि, विभाग द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है, जो श्रमिकों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
महाप्रबंधक का आश्वासन: दोषियों पर होगी कार्रवाई
संघ की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में गुमला अधीक्षण अभियंता को एक पत्र जारी कर रहे हैं। जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संघ की चेतावनी: आंदोलन के लिए होंगे मजबूर
संघ ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक श्रमिकों के अधिकारों की बहाली नहीं हो जाती।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और मुद्दों का समाधान
संघ के प्रतिनिधिमंडल में अजय राय के साथ अनिकेत कुमार सिंह, प्रवीण टोप्पो, मुकेश साहू, अमित कुमार, आनंद कुमार समेत अन्य वरिष्ठ सदस्य शामिल थे। उन्होंने महाप्रबंधक के सामने निम्नलिखित मुख्य मुद्दे उठाए:
- अवैध बहाली: बिना नई सीट आवंटन के नए कर्मियों की बहाली।
- पुराने कर्मचारियों की अनदेखी: अनुभवी कर्मचारियों को कार्य देने में अनदेखी।
- वेतन कटौती: कर्मचारियों को केवल 22-23 दिन का वेतन दिया जाना।
- एलआईसी पॉलिसी का दबाव: जबरन एलआईसी पॉलिसी लेने के लिए बाध्य करना।
- न्यूनतम मजदूरी का उल्लंघन: श्रम कानून के तहत पूर्ण वेतन का भुगतान न करना।
संघ का संकल्प
संघ ने कहा कि वे अपने सदस्यों के अधिकारों और कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह बैठक श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और विभाग में फैली अनियमितताओं को खत्म करने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
संघ ने झारखंड सरकार से भी अपील की है कि वह इन मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप करे और सुनिश्चित करे कि श्रमिकों के साथ न्याय हो।