संघर्ष, त्याग और सेवा के प्रतीक” — झामुमो महासचिव ने शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की रखी मांग
दिशोम गुरु शिबू सोरेन
मुनादी लाइव डेस्क , रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने गुरुवार को केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण और भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माता, आदिवासी समाज के मसीहा और देश के सामाजिक न्याय आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।
विनोद पांडेय के अनुसार, “गुरुजी का जीवन संघर्ष, प्रेरणा और जनसरोकारों से भरा रहा है। उनका हर कदम शोषित, वंचित और हाशिये पर खड़े लोगों के उत्थान के लिए था।”
आदिवासी चेतना के वाहक और आंदोलनकारी
शिबू सोरेन, जिन्हें पूरे देश में “दिशोम गुरु” के नाम से जाना जाता है, ने अपने जीवन में आदिवासी अस्मिता, अधिकार और सम्मान के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने 1970 के दशक में नशाखोरी और महाजनी प्रथा के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन ने न केवल हजारों परिवारों को कर्ज और शराब की गिरफ्त से बाहर निकाला, बल्कि आदिवासी समाज में नई चेतना भी जगाई।
विनोद पांडेय ने कहा कि गुरुजी का यह संघर्ष केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका असर पूरे पूर्वी भारत के आदिवासी क्षेत्रों में महसूस किया गया।
शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में योगदान
गुरुजी ने हमेशा यह माना कि शिक्षा ही समाज को सशक्त बना सकती है। उन्होंने आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में स्कूलों के निर्माण, छात्रावासों की स्थापना और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू करवाईं।
विनोद पांडेय के शब्दों में, “गुरुजी ने शिक्षा के माध्यम से आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने की कोशिश की। उनकी पहल ने हजारों युवाओं को नए अवसर दिए।”
झारखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता
शिबू सोरेन का नाम झारखंड राज्य के निर्माण से हमेशा जुड़ा रहेगा। उन्होंने झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को गति दी और 2000 में जब राज्य का गठन हुआ, तो यह उनके दशकों के संघर्ष का परिणाम था।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने हमेशा जनहित को प्राथमिकता दी। चाहे वह खनन क्षेत्रों में विस्थापितों के अधिकार हों या किसानों और मजदूरों के मुद्दे, गुरुजी हमेशा सबसे आगे रहे।
राजनीतिक सफर और उपलब्धियां
- तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।
- केंद्र में कोयला मंत्री के रूप में कार्य किया।
- कई बार संसद सदस्य के रूप में देश की नीतियों में योगदान दिया।
- आदिवासी अधिकारों के लिए कई विधेयकों और नीतियों की पैरवी की।
भारत रत्न की मांग — सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक
विनोद पांडेय ने कहा, “भारत रत्न केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि यह उस व्यक्ति के योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है। दिशोम गुरु का जीवन त्याग, संघर्ष और सेवा का अद्भुत उदाहरण है। उन्हें भारत रत्न देना न केवल उनके प्रति श्रद्धांजलि होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा।”
उन्होंने केंद्र सरकार से इस पर अविलंब निर्णय लेने की अपील की।
जनभावना और राजनीतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शिबू सोरेन को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो यह न केवल झारखंड के लोगों के लिए गर्व का विषय होगा, बल्कि यह आदिवासी समाज के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण होगा।



