मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने निभाई दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पारंपरिक श्राद्ध की रस्म, चौथे दिन बाबा को परोसा भोजन
नेमरा, गोला (रामगढ़): दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पारंपरिक श्राद्ध कर्म का आज चौथा दिन भावनात्मक माहौल में संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सुबह-सुबह धार्मिक मान्यताओं, संस्कारों और स्थानीय आदिवासी परंपराओं के अनुरूप अपने पिता को भोजन परोसने की विशेष रस्म पूरी श्रद्धा के साथ निभाई।

स्थानीय परंपरा में श्राद्ध की अहमियत
यह रस्म आदिवासी समाज की उन पुरानी परंपराओं में से एक है, जिसमें माना जाता है कि श्राद्ध के दौरान प्रतिदिन दिवंगत व्यक्ति को भोजन अर्पित करने से उसकी आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह क्रम कई दिनों तक चलता है, और प्रत्येक दिन स्थानीय विधि-विधान के अनुसार भोजन परोसने का आयोजन किया जाता है।
श्राद्ध के दौरान परोसा जाने वाला भोजन भी विशेष होता है — इसमें पारंपरिक व्यंजन, मौसमी सब्ज़ियां, चावल और दाल जैसे सादे लेकिन पवित्र माने जाने वाले पकवान शामिल होते हैं।

भावुक पल और श्रद्धा का वातावरण
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भोजन अर्पण करते समय अपने पिता के जीवन संघर्ष, आदिवासी समाज के प्रति उनकी सेवा और त्याग को याद किया। इस दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, झामुमो के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
पूरे कार्यक्रम में एक गहन श्रद्धा, भावुकता और सांस्कृतिक एकता का माहौल देखने को मिला। गांव के बुजुर्गों ने पारंपरिक गीत और मंत्रों के साथ अनुष्ठान को संपन्न करवाया।

दिशोम गुरु की स्मृति में
दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों के प्रतीक थे। उनके पारंपरिक श्राद्ध में निभाई जाने वाली हर रस्म उनकी जड़ों और परंपराओं से गहरे जुड़े होने का प्रतीक है।








