रामगढ़ से विशेष रिपोर्ट | श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा पत्रकारिता जगत का जनसैलाब, झारखंड के दो सपूतों को किया गया नमन

रामगढ़: झारखंड की आत्मा आज गमगीन है। एक तरफ झारखंड आंदोलन के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ पत्रकारिता जगत के मजबूत स्तंभ, वरिष्ठ संपादक स्व. हरिनारायण सिंह का निधन भी राज्य को भीतर तक झकझोर गया है। गुरुवार को प्रेस क्लब रामगढ़ परिसर में इन दो महान विभूतियों की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां शहर के दर्जनों पत्रकार, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता इकट्ठा हुए।

सभा के दौरान दो मिनट का मौन रख ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की गई। श्रद्धांजलि सभा का संचालन कोषाध्यक्ष दुर्वेज आलम ने किया। सभा में माहौल बेहद भावुक रहा—कुछ आँखों में आँसू थे, कुछ के कंठ रुंधे हुए थे, लेकिन हर किसी के शब्दों में दोनों दिवंगत आत्माओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा साफ झलक रही थी।
“शिबू सोरेन क्रांति थे, हरिनारायण सिंह कलम की तलवार”
प्रेस क्लब रामगढ़ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ‘वीरू’ ने सभा को संबोधित करते हुए कहा—“हमने दो लाल खो दिए। दिशोम गुरु ने राजनीतिक आंदोलन की मशाल थामी, तो हरिनारायण बाबू ने पत्रकारिता की दुनिया में झारखंड की अस्मिता को शब्दों में पिरोया। आज झारखंड दोनों ओर से अनाथ हो गया है। एक ने सड़क पर झारखंड के लिए जंग लड़ी, तो दूसरे ने अखबार के पन्नों पर क्रांति की इबारत लिखी।”
“हमारे आदर्श थे हरिनारायण बाबू”
सभा को संबोधित करते हुए प्रेस क्लब के सचिव धनेश्वर प्रसाद ने कहा—“हरिनारायण बाबू हम सभी के आदर्श थे। वे सिर्फ पत्रकार नहीं थे, वे एक आंदोलनकारी संपादक थे, जिनके शब्दों में आग थी, विवेक था और विचार की ताकत थी। उनकी लेखनी ने न जाने कितने पत्रकारों को तैयार किया, और आज वही कलम के सिपाही झारखंड के कोने-कोने में बदलाव की आवाज बने हुए हैं। उनका जाना निजी नहीं, सामूहिक क्षति है।”


भावुक हुए पत्रकार, एक स्वर में कहा—हम निभाएंगे उनकी विरासत
सभा में मौजूद कई पत्रकारों ने अपनी भावनाएं साझा कीं। वरिष्ठ पत्रकार शंकर देवघरिया ने कहा—“हरिनारायण बाबू ने झारखंड के मीडिया को दिशा दी। आज मीडिया जिस स्वरूप में है, उसमें उनका बड़ा योगदान है।” वहीं संरक्षक तरुण बागी ने कहा—“दिशोम गुरु और हरिनारायण बाबू दोनों ने अपनी-अपनी भूमिका में झारखंड को गढ़ा। एक ने सत्ता से टकराकर अधिकार मांगा, दूसरे ने कलम से अन्याय को उजागर किया।”

सभा में सहसचिव व्यास शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र सिंह भाटिया, नीरज अमिताभ, अमित कुमार सिन्हा, शिव मनोज कुमार, मुकेश सिंह, आरएस प्रसाद मुन्ना, नीरज सिन्हा, धर्मेंद्र कुमार पटेल, उमेश सिन्हा, अनिल विश्वकर्मा, विनीत शर्मा, निरंजन महतो, सुनील कुमार, अमरजीत कुमार, आरिफ कुरैशी समेत बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।


“झारखंड के दो स्तंभ गिर गए, लेकिन उनकी चेतना अमर रहेगी”
झारखंड को इस सप्ताह दो अपूरणीय क्षति झेलनी पड़ी है। शिबू सोरेन के रूप में एक ऐसा नाम खो दिया, जिसने पूरे जीवनकाल में आदिवासी समाज और झारखंड के हक की लड़ाई लड़ी। वहीं, हरिनारायण सिंह जैसे पत्रकार अब विरले ही मिलते हैं, जो सिद्धांत और मूल्य की पत्रकारिता करते हुए नई पीढ़ी को तैयार करते हैं। दोनों के जाने से झारखंड राजनीतिक और बौद्धिक स्तर पर कमजोर हुआ है।
लेकिन इनकी विरासत को आगे ले जाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यही संकल्प आज रामगढ़ के प्रेस क्लब में लिया गया—कि हम कलम नहीं रुकने देंगे, और जनता की आवाज को कमजोर नहीं पड़ने देंगे।