झारखंड में पहली बार बैलेट पेपर से होंगे नगर निकाय चुनाव, EVM नहीं होगी इस्तेमाल

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Ranchi: झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार राज्य के नगर निकाय चुनाव ईवीएम की जगह बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएंगे। ईवीएम की अनुपलब्धता के चलते यह निर्णय लिया गया है, जो झारखंड के शहरी चुनावी इतिहास में पहली बार होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच नगर निकाय चुनाव कराए जाने की तैयारी है। चुनाव की तिथियों की आधिकारिक घोषणा जल्द की जाएगी। राज्य में कुल 49 नगर निकायों में चुनाव होने हैं, जिनमें 9 नगर निगम, 18 नगर परिषद और 22 नगर पंचायत शामिल हैं।

क्यों नहीं होगी EVM से वोटिंग?
राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध ईवीएम की तकनीकी आयु समाप्त हो चुकी है। वहीं, ईवीएम निर्माण करने वाली कंपनी ने नए ईवीएम उपलब्ध कराने के लिए कम से कम एक साल का समय मांगा है। इसके अलावा, आयोग ने अन्य राज्यों से ईवीएम उपलब्ध कराने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी मशीन देने से इनकार कर दिया गया। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया।

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बैलेट पेपर से चुनाव की पूरी व्यवस्था
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई अहम व्यवस्थाएं की गई हैं।

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अध्यक्ष पद और वार्ड सदस्य के लिए अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर होंगे, ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न हो। प्रत्येक मतदाता को दो बैलेट पेपर दिए जाएंगे—एक अध्यक्ष पद के लिए और दूसरा वार्ड सदस्य के लिए। दोनों बैलेट पेपर को अलग-अलग बैलेट बॉक्स में डालना अनिवार्य होगा।

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राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि बैलेट बॉक्स की पर्याप्त संख्या उपलब्ध है। वर्तमान में बॉक्स की रंगाई-पुताई और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है ताकि चुनाव से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी हो सकें।

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49 नगर निकायों में होंगे चुनाव
इस बार जिन नगर निकायों में चुनाव कराए जाएंगे, उनमें राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्र शामिल हैं। नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने की संभावना है। बैलेट पेपर से चुनाव होने के कारण मतगणना प्रक्रिया में भी अतिरिक्त सावधानी और समय लगने की उम्मीद है।

राजनीतिक दलों की बढ़ेगी सक्रियता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के कारण राजनीतिक दलों को ग्राउंड लेवल पर अधिक सक्रियता दिखानी होगी। बूथ मैनेजमेंट, मतदाता संपर्क और मतगणना के दौरान निगरानी जैसी चुनौतियां दलों के सामने रहेंगी।

राज्य निर्वाचन आयोग का बयान
राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और चुनाव प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

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