2027 की डिजिटल जनगणना को केंद्र की मंजूरी, 11,718 करोड़ का बजट पास — देश में पहली बार पूरी गणना होगी डिजिटल
New Delhi: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वर्ष 2027 में प्रस्तावित जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जो देश की प्रशासनिक प्रणाली और डेटा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल मोड में होगी, जिसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस वार्ता में बताया कि 2027 में होने वाली यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसका डिजिटल डिजाइन डेटा प्रोटेक्शन और साइबर सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि नागरिकों की संवेदनशील जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
पहली बार देश भर में डिजिटल जनगणना: एक बड़े परिवर्तन की ओर कदम
भारत में 150 वर्षों से चली आ रही परंपरागत जनगणना पद्धति में यह पहली बार होगा कि पूरा डेटा डिजिटल रूप में संग्रहीत किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह डिजिटल सिस्टम न सिर्फ समय में कमी करेगा बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ाएगा और नीतिगत फैसलों में गति लाएगा।
जनगणना में लगभग 30 लाख कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जो टैबलेट और मोबाइल आधारित एप्लिकेशन का उपयोग करते हुए घर–घर जाकर सूचनाएं दर्ज करेंगे। यह प्रक्रिया भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल करेगी, जिन्होंने जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाने का साहसिक प्रयास किया है।
दो चरणों में होगी जनगणना, अप्रैल 2026 से होगी शुरुआत
सरकार ने इसकी समय-सारिणी भी जारी कर दी है। पहले चरण में देशभर में हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग की गणना होगी। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक परिवार से मूलभूत आवास जानकारी ली जाएगी।
दूसरे चरण में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 से शुरू होगी। यह वह चरण है जिसमें नागरिकों से सभी सामाजिक, आर्थिक और जनसंख्या संबंधी विस्तृत जानकारी ली जाती है। सरकार का दावा है कि डिजिटल मोड होने के कारण प्रोसेसिंग में लगने वाला समय पहले की तुलना में काफी कम होगा और परिणाम तेजी से सामने आ सकेंगे।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष फोकस
मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि चूंकि जनगणना संवेदनशील राष्ट्रीय डेटा का संग्रहण है, इसलिए डिजिटल सिस्टम को विशेष रूप से डेटा प्रोटेक्शन कानून के अनुरूप तैयार किया गया है। प्रत्येक जानकारी एन्क्रिप्टेड फॉर्म में अपलोड होगी और किसी भी प्रकार की अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए मल्टी-लेयर सुरक्षा दी गई है।
सरकार डिजिटल मोड को भविष्य की जनगणनाओं का आधार मानते हुए इसे स्थायी बदलाव की दिशा में पहला बड़ा कदम मान रही है।
कैबिनेट की बैठक में दो और बड़े फैसले: कोयला सुधार और किसान हित
कैबिनेट की बैठक में दो अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। पहला फैसला कोयला सेक्टर में बड़े सुधार को लेकर था। सरकार ने Coal Setu के माध्यम से कोयला उत्पादन और सप्लाई को सुव्यवस्थित करने की नई नीति को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने 2024–25 में ऐतिहासिक रूप से एक अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन किया है, जिससे आयात में कमी आई और देश को लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई।
इसके अलावा किसानों के कल्याण से जुड़े एक प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई, जिसकी विस्तृत जानकारी आने वाले दिनों में सार्वजनिक की जाएगी।
भारत को डेटा–ड्रिवन गवर्नेंस की ओर ले जाने वाली निर्णायक पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 की डिजिटल जनगणना भारत को डेटा–ड्रिवन गवर्नेंस के नए दौर में ले जाएगी। आंकड़े तेज़ी से उपलब्ध होंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी और नीतियों को अधिक सटीक रूप से लागू किया जा सकेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार योजनाओं के लिए जनगणना को आधारभूत स्तंभ माना जाता है। इसलिए इसका डिजिटल रूपांतरण भविष्य की योजनाओं को और अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा।








