अमरावती बनेगी आंध्र प्रदेश की राजधानी, संसद में 1 अप्रैल को बिल लाने की तैयारी
विधानसभा से प्रस्ताव पास, केंद्र सरकार जल्द ला सकती है विधेयक
मुनादी लाइव : आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य की नई राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 28 मार्च को सर्वसम्मति से अमरावती को राजधानी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
अब केंद्र सरकार इस फैसले को कानूनी रूप देने के लिए 1 अप्रैल को संसद में बिल पेश करने की तैयारी कर रही है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो अमरावती को आधिकारिक रूप से आंध्र प्रदेश की राजधानी घोषित कर दिया जाएगा।
हैदराबाद से अलगाव के बाद बना था विवाद
हैदराबाद पहले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों की संयुक्त राजधानी हुआ करता था। 2014 में राज्य के विभाजन के बाद यह तय किया गया था कि कुछ समय तक हैदराबाद दोनों राज्यों की राजधानी रहेगा। हालांकि, यह व्यवस्था अस्थायी थी और आंध्र प्रदेश को अपनी स्थायी राजधानी स्थापित करनी थी। इसी क्रम में अमरावती का नाम सामने आया, लेकिन बाद में इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़े हुए।
अमरावती को लेकर फिर तेज हुई प्रक्रिया
अमरावती को राजधानी बनाने का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया है। विधानसभा से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब केंद्र सरकार की भूमिका अहम हो गई है। सरकार का मानना है कि नई राजधानी के रूप में अमरावती के विकास से राज्य में बुनियादी ढांचे, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अहम फैसला
यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी बनने के बाद अमरावती में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा और क्षेत्रीय संतुलन भी बेहतर होगा।
आगे क्या?
अब सबकी नजर 1 अप्रैल पर टिकी है, जब संसद में इस प्रस्ताव से जुड़ा बिल पेश किया जा सकता है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर वर्षों से चला आ रहा असमंजस खत्म हो जाएगा। फिलहाल, इस फैसले को राज्य के भविष्य के लिए एक बड़े और निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।







