बिहार चुनाव में झामुमो की एंट्री: मिथिलेश ठाकुर बोले– जीत की संभावनाओं वाली सीटों पर ही लड़ेगी पार्टी
गढ़वा में विद्यालय गोद लेने के कार्यक्रम में बोले पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर, विपक्ष पर साधा निशाना
गढ़वा: बिहार विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि पार्टी बिहार में उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ेगी जहां जीत की संभावना मजबूत है और गठबंधन का तालमेल अनुकूल रहेगा।
उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में उथल-पुथल होना तय है। मिथिलेश ठाकुर का यह बयान गढ़वा जिले के फरठिया गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में आया।
विद्यालय गोद लेने के कार्यक्रम में दिया बड़ा राजनीतिक बयान
मंगलवार को फरठिया गांव में एक उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय को एएनजी मेन पावर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने तीन वर्षों के लिए गोद लिया। इसी कार्यक्रम में पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि झामुमो बिहार में मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा और जहां संभावनाएं होंगी, वहीं चुनाव लड़ा जाएगा।
ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की पहल सराहनीय
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर कंपनी के निदेशक नागेश गौड़ा और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। ठाकुर ने कहा कि कंपनी ने केवल एक साल में सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा, “ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए ऐसे प्रयास बेहद जरूरी हैं।”
कंपनी ने बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल, पंखा, डेस्क-बेंच, पुस्तकें और खेल सामग्री की व्यवस्था की है। ठाकुर ने कहा कि इससे गांव के बच्चे बेहतर माहौल में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
सीएसआर के तहत मजदूर परिवार को आर्थिक सहयोग
कार्यक्रम में कंपनी की सीएसआर पहल के तहत एक विशेष सहायता प्रदान की गई। हाल में काम के दौरान घायल हुए एक मजदूर को कंपनी ने पांच लाख रुपये का बीमा लाभ दिया। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को तत्काल एक लाख रुपये का चेक भी सौंपा गया। इस मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने कंपनी की सराहना की।
राजनीति और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम
पूर्व मंत्री ठाकुर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सियासी हलचल तेज हो चुकी है। झामुमो के मैदान में उतरने के ऐलान से राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। वहीं, सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।








