बजट से निराश मिडिल क्लास की नजर अब RBI पर
मुनादी लाइव डेस्क: केंद्रीय बजट 2026 से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठे मिडिल क्लास को इस बार खास फायदा नहीं मिला। न तो आयकर में कोई बड़ी कटौती की घोषणा हुई और न ही ऐसी कोई बड़ी स्कीम आई, जिससे सीधे वेतनभोगी वर्ग को राहत मिलती। ऐसे में अब लोगों की नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति पर टिकी हुई हैं।
शुरू हुई MPC की अहम बैठक
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 4 फरवरी से शुरू हो चुकी है, जो 6 फरवरी तक चलेगी। इसी दिन रेपो रेट को लेकर बड़ा ऐलान किया जाएगा। आम तौर पर जब बजट से राहत नहीं मिलती, तो लोग उम्मीद करते हैं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती कर EMI और लोन के बोझ को हल्का करेगा।
लेकिन इस बार हालात कुछ अलग दिख रहे हैं।
रेपो रेट में कटौती की उम्मीद कम
जानकारों का मानना है कि इस बार मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक से बड़े फैसले की उम्मीद कम है। ब्याज दरों में कटौती की संभावना बेहद सीमित मानी जा रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि साल 2025 में RBI पहले ही रेपो रेट में चार बार कटौती कर चुका है। कुल मिलाकर लगभग 1.25 प्रतिशत की कमी की गई थी, जिससे रेपो रेट 6.5% से घटकर 5.25% पर आ गया था। यानी पहले ही काफी राहत दी जा चुकी है।
EMI पर क्या होगा असर?
अगर इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता, तो होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI में तत्काल राहत मिलना मुश्किल है। मिडिल क्लास, जो पहले ही महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहा है, उसे फिलहाल ब्याज दरों के मोर्चे पर भी इंतजार करना पड़ सकता है।
वैश्विक हालात भी बने वजह
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी बाजारों की स्थिति को देखते हुए RBI बहुत सतर्क रुख अपना सकता है। ऐसे में महंगाई नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जा सकती है, भले ही ब्याज दरों में कटौती की मांग हो।
अब 6 फरवरी पर टिकी निगाहें
मिडिल क्लास के लिए फिलहाल यही उम्मीद बची है कि RBI कुछ ऐसा संकेत दे, जिससे आने वाले महीनों में दरों में नरमी का रास्ता खुले। लेकिन फिलहाल के संकेत बताते हैं कि 6 फरवरी का फैसला स्थिर दरों की ओर झुक सकता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि बजट के बाद RBI का यह कदम आम लोगों की जेब पर कितना असर डालता है।








