सीसीएल के केरेडारी कोल परियोजना में जमीन रिकॉर्ड घोटाला, सरकार ने मांगी रिपोर्ट
417 एकड़ भूमि अधिग्रहण में अनियमितता, CID जांच के बाद प्रशासन हरकत में
Hazaribagh : सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की हजारीबाग जिले के केरेडारी स्थित चंद्रगुप्त ओपन कास्ट कोल परियोजना में बड़े पैमाने पर जमीन के रिकॉर्ड में अनियमितता और धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है और हजारीबाग के जिला उपायुक्त (DC) तथा हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ से मामले की वस्तुस्थिति और मंतव्य तलब किया गया है।
417 एकड़ जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है पूरा मामला
पूरा विवाद परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही 417 एकड़ भूमि से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि भूमि से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड या तो गायब हैं, या फिर अपठनीय और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा जानबूझकर फॉर्म-1 का गठन किया गया।
फॉर्म-1 के दुरुपयोग का आरोप
आमतौर पर फॉर्म-1 भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का प्रारंभिक दस्तावेज माना जाता है, लेकिन इस मामले में इसका कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि फॉर्म-1 का गठन कर भूमि मालिकों को गुमराह किया गया और मुआवजा प्रक्रिया में हेराफेरी की गई।
इस पूरे मामले की शिकायत मंटू सोनी उर्फ शनि कांत नामक व्यक्ति द्वारा की गई थी, जिसमें जमीन अधिग्रहण से जुड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
CID जांच में आरोप सही पाए गए
शिकायत के आधार पर सीआईडी ने पूरे मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई है। CID ने इस साल जुलाई महीने में जांच पूरी कर ली थी और कार्रवाई की अनुशंसा के साथ अपनी रिपोर्ट गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को सौंप दी थी।
गृह विभाग ने मांगा राजस्व विभाग से मंतव्य
CID की अनुशंसा के बाद गृह विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 नवंबर को राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग से इस पूरे प्रकरण पर मंतव्य और वस्तुस्थिति मांगी थी।
DC और DFO से भी तलब की गई रिपोर्ट
राजस्व विभाग से मंतव्य मिलने के बाद गृह विभाग ने दिसंबर महीने में आगे की कार्रवाई करते हुए हजारीबाग जिला उपायुक्त और पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ से भी इस पूरे मामले में वस्तुस्थिति और अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
कोयला परियोजनाओं में पारदर्शिता पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कोयला परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित घोटाले की ओर इशारा करता है।
अब सबकी नजर सरकार द्वारा प्राप्त रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई या आपराधिक केस दर्ज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।








