आंतरिक शांति के महत्व पर डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल में समृद्धि सत्र आयोजित

Dav Nandraj Public School

मुनादी लाइव: डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल में पीस एजुकेशन प्रोग्राम के अंतर्गत आंतरिक शांति के महत्व को लेकर एक विशेष समृद्धि सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र प्रसिद्ध शांति दूत प्रेम रावत की शिक्षाओं से प्रेरित था, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों के भीतर आत्म-जागरूकता और संतुलन को विकसित करना था।

कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के गूंज ऑडिटोरियम में किया गया, जहां शिक्षकों, विद्यालय कर्मियों और सहयोगी टीम के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतिनिधियों ने किया सार्थक संवाद
इस अवसर पर कार्यक्रम के प्रतिनिधि सुजीत कुमार और उदय विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों और स्टाफ के साथ संवाद स्थापित करते हुए आंतरिक शांति और मानसिक संतुलन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

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सत्र के दौरान प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि जीवन की भागदौड़ और तनाव के बीच भी व्यक्ति अपने भीतर शांति स्थापित कर सकता है।

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“शांति की शुरुआत भीतर से” – सत्र का मुख्य संदेश
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि शांति बाहर नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर से शुरू होती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आंतरिक शांति से मानसिक तनाव कम होता है, निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है, कार्यस्थल का वातावरण सकारात्मक बनता है और रिश्तों में सामंजस्य बढ़ता है।

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इस दौरान प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि यदि व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को संतुलित रखता है, तो वह जीवन की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकता है।

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आत्मचिंतन और जागरूकता पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार पर आत्मचिंतन करने के लिए प्रेरित किया गया।उन्हें यह सुझाव दिया गया कि वे अपने दैनिक जीवन में शांति, संतुलन और आत्म-जागरूकता को अपनाएं, ताकि व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

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प्रतिभागियों के लिए रहा प्रेरणादायक अनुभव
यह समृद्धि सत्र प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और प्रभावशाली साबित हुआ। सत्र के बाद कई शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों ने इसे अपने जीवन में उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिक्षा के साथ भावनात्मक विकास पर जोर
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनता है, बल्कि एक संतुलित और सकारात्मक समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

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